अधिवक्ता ने सीएमएस समेत कई स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए दिया दरखास्त

जौनपुर। दीवानी न्यायालय के अधिवक्ता रामसकल यादव निवासी खिजिरपुर मड़ियाहूं ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक तथा जिला चिकित्सालय के डॉक्टर और नर्सों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कराने की सोमवार को पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र दिया। उनका आरोप है कि 29 अप्रैल 2021 को जिला चिकित्सालय में अपनी कोरोना संक्रमित बहन को भर्ती कराया था जहां ऑक्सीजन लेवल कम होने के बावजूद ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं कराई गई।मुख्य चिकित्सा अधीक्षक,डॉक्टरों व नर्स की घोर उपेक्षा व लापरवाही से उनकी बहन की 3 मई 2021 को मृत्यु हो गई।कोतवाल को दरखास्त दिया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई तब पुलिस अधीक्षक को दरखास्त देकर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा कर दंडात्मक कार्यवाही की मांग किया। 

 अधिवक्ता राम शकल ने अपनी बहन चंद्रावती देवी चिकित्सालय के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया। अगले दिन लापरवाही पूर्वक उसे मेडिकल वार्ड के बेड नंबर 7 पर शिफ्ट कर दिया।बहन कोरोना संक्रमित थी तथा सांस लेने में समस्या थी।ऑक्सीजन लेवल काफी डाउन हो रहा था मुख्य चिकित्सा अधीक्षक अनिल कुमार शर्मा को सूचना दिया तो उन्होंने ऑक्सीजन देने से इनकार कर दिया कहा कि ऑक्सीजन न होने की सूचना आला अधिकारियों को दे दिया हूं जबकि महिला चिकित्सालय के अहाते में ऑक्सीजन गोडाउन में उपलब्ध था।सिटी स्कैन कराने के लिए कहा तो चिकित्सा अधीक्षक ने कहा सीटी स्कैन कराने जाओगे तो दोबारा बेड नहीं मिलेगा।किसी तरह ब्लड लेकर बाहर से जांच कराए तो इंफेक्शन की जानकारी हुई।डॉक्टर कभी वार्ड में नहीं आते थे।कहते थे कि कोरोना संक्रमित लोगों के बीच मरना नहीं है। मरीज चाहे जिए या मरे।काफी प्रयास के बाद 3 मई 2021 को डॉक्टर वार्ड में आए और कहे कि आप के मरीज को 7 इंजेक्शन लगाया गया है जबकि दो ही इंजेक्शन लगाया गया था। डॉक्टर ने कहा कि आपकी बहन को रेफर कर दिया गया है जबकि इसकी कोई जानकारी उसे नहीं दी गई।गैर जिम्मेदाराना इलाज का वीडियो बनाने पर डॉक्टर साहब डांटने लगे।कई हेल्पलाइन नंबर पर फोन लगाया तो बिना पूरी बात सुने फोन काट दिया गया।कई फोन तो नॉट रिचेबल बता रहे थे। चिकित्सा अधीक्षक, डॉक्टरों,नर्सों की उपेक्षा व लापरवाही के कारण 3 मई 2021 को 10:00 बजे बहन चंद्रावती ने हॉस्पिटल में ऑक्सीजन न मिलने के कारण दम तोड़ दिया।कोतवाल को आरोपितों के खिलाफ कार्यवाही के लिए प्रार्थना पत्र दिया।वीडियो रिकॉर्डिंग का भी जिक्र किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई तब उसने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर एफ आई आर दर्ज कराने की मांग किया।

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