महिलाओं ने अपने अखंड सौभाग्य के लिए रखा वट सावित्री व्रत

जौनरपुर। ज्येष्ठ मास के कृष्णपक्ष की अमावस्या पर गुरुवार को महिलाओं ने अपने अखंड सौभाग्य के लिए वट सावित्री व्रत रखा। यह व्रत अखंड सौभाग्य का प्रतीक है। यह व्रत महिलाएं पति के दीर्घायु व धन धान्य से समृद्धि के लिए रखती हैं। सती सावित्री ने यह व्रत अमावस्या के दिन अपने पति सत्यवान की प्राण रक्षा के लिए रखा था।

 हिन्दू धर्म में वट सावित्री अमावस्या सौभाग्यवती स्त्रियों का महत्वपूर्ण पर्व है। इस व्रत को ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी से अमावस्या तक करने का विधान है। व्रत धारण करने वाली महिलाओं ने बरगद वृक्ष के चारों ओर घूमकर पूजा अर्चना की। तत्पश्चात वट वृक्ष के चौरों ओर रक्षा सूत्र बांधकर पति के लंबी आयु की कामना की। मान्यता है कि वट सावित्री व्रत करने से पति दीर्घायु और परिवार में सुख शांति आती है। पुराणों के अनुसार वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों देवता का वास है। वट सावित्री व्रत में ‘वट और ‘सावित्री दोनों का खास महत्व माना गया है। इस व्रत को कुमारी, विवाहिता, कुपुत्रा, सुपुत्रा, विधवा सभी महिलाएं रखती हैं। अमावस्या तिथि बुधवार नौ जून को दोपहर एक बजकर 57 मिनट पर लगी और गुरुवार 10 जून को शाम चार बजकर 22 मिनट तक रही।

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