आंख में आंसू, दिल में आग, परिवार में कोहराम तो गांव में मातम

 

जौनपुर।  शुक्रवार को आंख में आंसू, दिल में आग, परिवार में कोहराम तो गांव में मातम कुछ ऐसा ही हाल रहा हरखपुर गांव के कुकरिहांव पुरवा में । दोनों मृत बेटियों के स्वजन के चेहरे पर गम व गुस्सा साफ झलक रहा था। माता-पिता की बदनसीबी की चर्चा हर किसी की जुबान पर थी कि दंपती बेटियों का अंतिम दर्शन नहीं कर सके। मुंबई से घर आने के लिए ट्रेन पर सवार दंपती के शनिवार की सुबह आने की उम्मीद है। 

 खून के प्यासे चचेरे भाई-भाभी के बांका से हमले में मृत पूर्णिमा व अंतिमा पांडेय के शवों का पोस्टमार्टम के बाद गुरुवार की देर रात रामघाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। मुखाग्नि भाई जतिन पांडेय उर्फ बंटी ने दी। संवेदना जताने के लिए शुक्रवार की सुबह से ही काफी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग व बच्चों के साथ मौजूद नौजवानों में गम और गुस्सा नजर आ रहा था। वे गांव में तैनात पुलिस बल की तरफ निगाह दौड़ाते फिर आंखों के आंसू पोंछ लेते। यह सिलसिला दिनभर चलता रहा। इस सनसनीखेज घटना से हतप्रभ लोग दोषियों को कोसते रहे। जतिन की एक ही मांग है कि हत्यारोपितों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। 
बहन पुष्पा व अन्य रिश्तेदारों से रोते हुए जतिन बार-बार यही कह रहा है कि काश, मौके पर मैं होता तो शायद उनकी जान बचा लेता। जतिन ने बताया कि विवाद से बचने के लिए ही पिता ने पुश्तैनी मकान छोड़कर बाहर अलग घर बनवाकर रहने लगे थे। 17 वर्ष पूर्व मेरे पिता को जमीन के बंटवारे को लेकर चाचा व अन्य लोग मारे-पीटे थे। मेरे दरवाजे के सामने जबरन मंदिर बनाने का प्रयास किया तब भी मारपीट हुई थी। गांव में शांति व्यवस्था के लिए एहतियात के तौर पर एसआइ संतराम यादव पुलिस जवानों के साथ डटे हुए हैं।

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