बल्लभ पंत डिग्री कॉलेज के प्रबंधन पर दो करोड़ आठ लाख जुर्माना

जौनपुर। ग्रामसभा की जमीन पर निर्मित गोविद वल्लभ पंत डिग्री कालेज को भूमि से बेदखली का आदेश सहायक कलेक्टर महेंद्र बहादुर ने जारी किया है। इसके साथ ही विद्यालय प्रबंधक पर दो करोड़, आठ लाख, चौहत्तर हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का भी आदेश दिया है। 
 मछलीशहर तहसील के सुरतासापुर निवासी शिवशंकर यादव ने उपजिलाधिकारी सदर को प्रार्थना पत्र देकर गोविद वल्लभ पंत डिग्री कालेज के प्रबंधक पर ग्राम समाज की परती भूमि पर अवैध रूप से कालेज बनाने व विद्यालय से लाभ लेने का आरोप लगाया था। एसडीएम के निर्देश पर लेखपाल ने रिपोर्ट कोर्ट में दिया था कि ग्रामसभा की आराजी जो नवीन परती के खाते में दर्ज है। रकबा 0.1988 हेक्टेयर पर विद्यालय के कमरे व बाउंड्रीवाल बनाकर अनाधिकार रूप से कब्जा कर लिया गया है। इसके साथ ही ग्रामसभा की जमीन खाली कराने के लिए रिपोर्ट की थी। 
इसके बाद विद्यालय प्रबंधक सुधीर उपाध्याय ने आपत्ति दाखिल किया था कि लेखपाल की रिपोर्ट सही नहीं है। विद्यालय का संचालन व्यक्तिगत हित में नहीं है, बल्कि समाज को शिक्षित करने के उद्देश्य से छात्र-छात्राओं के हित में संचालित किया जा रहा है। ग्रामसभा की जमीन के बदले वे दूसरी जमीन देने को तैयार हैं। इसके विरुद्ध एक दूसरी आपत्ति गांव के शिव शंकर यादव ने दाखिल किया कि विद्यालय ट्रस्ट से संचालित है। ट्रस्ट के सदस्य व पदाधिकारी लाभ प्राप्त करते चले आ रहे हैं। लेखपाल की रिपोर्ट सही है। 
अतिरिक्त उपजिलाधिकारी ने लेखपाल की रिपोर्ट व अन्य अभिलेखीय साक्ष्य को सही पाते हुए ग्रामसभा की भूमि से अनाधिकार कब्जा हटाने व विद्यालय प्रबंधक से क्षतिपूर्ति की राशि की वसूली के लिए तहसील कर्मियों को आदेश दिया है। 
कालेज के प्रबंधक  सुधीर उपाध्याय ने कहा कि विद्यालय के नाम 52 एकड़ जमीन है जो अवैध कब्जे में फंसी है। वर्ष 2015 से मैं विद्यालय का प्रबंधक हुआ, जबकि महाविद्यालय 1964 से कायम है। दो बार चकबंदी हुई, लेकिन अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। काश्तकारों के मालियत लेकर विद्यालय के कुछ अंश की जमीन को नवीन परती के रूप में घोषित कर दिया। लापरवाही चकबंदी अधिकारियों, लेखपालों व कानूनगो की है। मामले को लेकर उच्चाधिकारियों के साथ ही हाईकोर्ट जाऊंगा।

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  1. अरे 1964 से कॉलेज है तो इसके पहले की सरकार क्या कर रही थी और उन अधिकारियों को भी सजा और जुर्माना होना चाहिए जो उस समय समय पर उस पर ध्यान नहीं दिया है और अगर यह सही नहीं है तो जो आपत्ति दर्ज कराया है उसकी भी जांच होनी चाहिए और निष्पक्ष जांच करके दूध का दूध पानी का पानी होना चाहिए विद्यालय 1 बच्चों को संस्कार देने वाला मंदिर होता है और मंदिर के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए हो सकता है इसमें किसी की दुर्भावना हो शेष नारायण पांडे सूरत बहुत-बहुत धन्यवाद

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