बड़े गौर से सुन रहा था जमाना तुम्ही सो गए दास्तां कहते कहते हैं : डॉ सलाउद्दीन

भारत रत्न देश के रह चुके यशस्वी प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई के जन्मदिन 25 दिसंबर 1924 की पावन छड़ को इस भारत भूमि के लिए एक अविस्मरणीय दिन बताते हुए शीराज़ ए हिन्द सहयोग फॉउंडेशन के अध्यक्ष डॉ मोहम्मद सलाउद्दीन ने  कहा कि स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेई एक ऐसे महान पुरुष थे जिन्होंने अपने कृत्यों से न केवल भारत माता का सर ऊंचा किया बल्कि पूरे विश्व में सकारात्मक राजनीतिक सोच, विश्व बंधुत्व और सांप्रदायिक समर सता और इंसानियत के वजूद को कायम रखने के लिए जीवन की अंतिम सांस तक मानवता के कल्याण के लिए अपने विचारों से प्रेरित करते रहे बाजपेई जी की निम्नलिखित आज पंक्तियां सामाजिक सरोकार के लिए नित्य संघर्ष का आवाहन करते हैं:-

" हार नहीं मानूंगा,
रार नहीं ठानूंगा
काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं
गीत नया गाता हूं।"
शत शत नमन

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