जौनपुर की सुमति श्रीवास्तव समेत देश के 18 संपादकों को मिला " निरूपक मणि "सम्मान

जौनपुर। साहित्य संगम संस्थान नई दिल्ली द्वारा 101 एकल काव्य संग्रह ' आहुति ' के संपादन में उत्कृष्ठ और उल्लेखनीय योगदान करने के लिए जौनपुर की सुमति श्रीवास्तव समेत देश के 18 संपादकों को " निरूपक मणि "सम्मान से सम्मानित किया गया । सुमति नगर सिटी स्टेशन के पास स्थित नई कालोनी की निवासी तथा प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका है , सुमति टीचर के साथ अच्छी काब्यपाठ लिखती और पढ़ती है। इन सभी विभूतियों को बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर आहुति महोत्सव में यह सम्मान विशेष अतिथि, सेवा निवृत्त आई पी एस अधिकारी प्रशांत करण के कर कमलों से प्रदान किया गया । कार्यक्रम का सफल संचालन हरियाणा इकाई के अध्यक्ष विनोद वर्मा दुर्गेश तथा कार्यकारी अध्यक्ष दविना अमर ठकराल द्वारा किया गया । साहित्य संगम संस्थान की छत्तीसगढ़ इकाई की सचिव सह मीडिया प्रभारी भारती यादव मेधा ने यह जानकारी दी । 

 आहुति संपादन में उल्लेखनीय योगदान के लिए "निरूपक मणि" सम्मान से सम्मानित होने वाले आहुति सम्पादकों में कुमार रोहित रोज़, मिथिलेश सिंह मिलिंद,संगीता मिश्रा,सुमति श्रीवास्तव, राम प्रसाद दुबे, विनोद वर्मा दुर्गेश,जी बी श्रीकांत, भावना दीक्षित ज्ञान श्री,छाया सक्सेना, कुसुमलता कुसुम, भारती यादव 'मेधा', जय श्री कांत, रीतू गुलाटी, प्रेमलता उपाध्याय, कुमुद् श्रीवास्तव कुमुदनी, चन्द्र मुखी मेहता, मंजूषा किंजवडेकर, गीता गुप्ता मन शामिल हैं । इनके साथ ही प्रशांत करण, प्रमोद चौहान तथा प्रवीणा कालगांवकर को भारत गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया । 
 गौरतलब है कि संस्थान के अध्यक्ष राजवीर सिंह मंत्र द्वारा काव्य मनीषियों की रचनाओं को संकलित कर 101 आहुति एकल काव्य संग्रह के निशुल्क निर्माण का शिव संकल्प एक वर्ष पूर्व लिया गया था । इस आहुति यज्ञ के कर्णधार संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ.कुमार रोहित रोज रहे जिनके अथक प्रयासों का ही सुफल ये १०१ आहुतियां हैं | कुमार रोहित रोज़ ने इस यात्रा में न जाने कितने अलंकरण शास्त्री तैयार किए बहुत सारे कोरे कागजों को रंगीन अलंकरण हुनर से सजाया ऐसा निः स्वार्थ सेवा भाव वंदनीय अभिनंदनीय है |इस संकल्प को पूरा करने में संस्थान के सह अध्यक्ष आ. मिथिलेश सिंह मिलिंद कदम दर कदम सहभागी बने । साहित्य संगम संस्थान नई दिल्ली द्वारा साहित्य मनीषियों की कृतियों को पुस्तक माला रूप में संकलित करने के इस पुनीत साहित्यिक यज्ञ में 101 रचनाकारों द्वारा अपनी रचनाओं की आहुति दी गयी है । आहुति के रूप में प्रस्तुत एकल पुस्तक माला न केवल रचनाकारों और साहित्यानुरागियों के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि हिंदी भाषा के विकास में भी नये कीर्तिमान स्थापित करने में सहयोगी है।

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