जब-जब धर्म की हानि होती है, तब भक्तों के कल्याण हेतु भगवान अवतार लेते हैं

जौनपुर।  श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के चौथे दिन का आरंभ पंडित आनंद मिश्रा जी के मार्गदर्शन में वैदिक मंत्रोच्चारण और भगवान श्री बालकृष्ण का अभिषेक डॉ रजनीश श्रीवास्तव एवं डॉ स्मिता श्रीवास्तव ने गाय के दूध से किया तत्पश्चात भगवान को पंचामृत का स्थान करा विधिवत पूजन अर्चन सिंगार करके प्रभु के नाम जयकारे से प्रारंभ हुआ। काशी से आए पुरोहितों के मंत्रोच्चारण की ध्वनि से क्षेत्र गूंज उठा। चौथे दिन कथा व्यास डॉ रजनीकांत द्विवेदी जी ने गजेंद्र मोक्ष और वामन अवतार की कथा के साथ-ही-साथ श्री राम जन्मोत्सव और श्री कृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुनाई। इस मौके पर भगवान श्री कृष्ण की जीवंत झाकियां सजाई गई, जिसे देखकर श्रद्धालु अभिभूत हो उठे।

डॉ रजनीकांत द्विवेदी जी महराज ने कथा की मीमांसा करते हुए कहा कि नंदोत्सव अर्थात श्री कृष्ण जन्म से पहले नवम स्कंध के  अंतर्गत राम कथा के महत्व को बताया और  भागवत में श्रीकृष्ण जन्म से पहले राम कथा के महत्व वर्णन करते हुए बताया कि जब तक हमारा जीवन  भगवान राम की तरह नहीं रहेगा तब तक श्री कृष्ण कथा हमें समझ में नही आयेगी। कथा व्यास जी  ने कहा कि भागवत कथा एक ऐसी कथा है जिसे सुनने ग्रहण करने से मन को शांति मिलती है अपने शरीर में भरी मैल को साफ करने के लिए अगर इसे मन से ग्रहण करें तो यह अमृत के समान है इसमें अपने अंदर का "मैं" अर्थात अहंकार खत्म करना चाहिए। व्यास जी ने कहा कि मानव का सबसे बड़ा दुश्मन हमारे अंदर बैठा अहंकार है श्रीमद् भावगत कथा अपने मन में बँठा "मैं" और अहंकार को खत्म करने का उचित दर्शन है।
श्रीमद्भागवत के पंचम स्कन्धानुसार राजा बलि से तीन पग पृथ्वी नापने के समय भगवान वामन का बांया चरण ब्रह्माण्ड के ऊपर चला गया, वहां ब्रह्माजी के द्वारा भगवान के पाद प्रच्छालन के बाद उनके कमण्डल में जो जलधारा स्थित थी वह उनके चरण-स्पर्श से पवित्र होकर ध्रुवलोक में गिरी और परम पवित्र गंगा का उद्गम हुआ।
श्री कृष्ण जन्मोत्सव और भगवान कृष्ण के लीला का मनोहारी वर्णन करते हुए  व्यास जी ने बताया राजा परीक्षित से शुकदेव कहते हैं, कि संसार का कल्याण करने के लिए भगवान अवतार लेते हैं और जब-जब धर्म की हानि होती है, तब सज्जनों का कल्याण और राक्षसों का वध करने के लिए भगवान अवतार लेते हैं। इसके बाद व्यास जी ने संगीतमयी चौपाइयों-जब-जब होई धर्म की हानि, बाढहि असुर अधम अभिमानी, तब-तब धरि प्रभु मनुज शरीरा, हरहि कृपा निज सज्जन पीरा।। आदि चौपाइयों से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।
प्रगटे हैं चारों भैया में, अवध में बाजे बधईया॥ जगमगा जगमग दियाला जलत है, झिलमिल होत अटरिया, अवध में बाजे बधईया॥ इस भजन पर श्रोता झूम उठे।
सीता राम के दिव्य विवाह का मनोहारी वर्णन सुनकर और अलौकिक झांकी देख कर भक्त मंत्र मुग्ध हो गए।
 राम राज्य की व्याख्या करते हुए व्यास जी ने बताया कि 'श्रीरामचरितमानस' में तुलसीदास जी लिखा है-राम राज बैठे त्रैलोका। हरषित भए गए सब सोका।। अर्थात्
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के सिंहासन पर आसीन होते ही सर्वत्र हर्ष व्याप्त हो गया, सारे भय-शोक दूर हो गए एवं दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति मिल गई।
भगवान के नामकरण का प्रसंग बताते हुए श्रीरामचरितमानस की चौपाई की व्याख्या किया-  
जो आनंद सिंधु सुखरासी। सीकर तें त्रैलोक सुपासी॥ सो सुखधाम राम अस नामा। अखिल लोक दायक बिश्रामा॥ अर्थात् ये जो आनंद के समुद्र और सुख की राशि हैं, जिस (आनंदसिंधु) के एक कण से तीनों लोक सुखी होते हैं, उन (आपके सबसे बड़े पुत्र) का नाम 'राम' है, जो सुख का भवन और संपूर्ण लोकों को शांति देनेवाला है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग व उनके जन्म लेने के गूढ़ रहस्यों को कथा व्यास जी ने बेहद रोचक और जीवंत व्याख्या के साथ सुनाया। कथा प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास जी ने बताया कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए। कथा का संगीतमयी वर्णन सुन राधा-कृष्ण के उदघोष के साथ श्रद्धालुगण झूमने लगे।
श्रीमद भागवत कथा के इस पावन अवसर पर मुख्य यजमान के रूप में श्रीमती किरनलता सोनी पत्नी श्री ललित सोनी जी और श्रीमती राजरानी गुप्ता पत्नी श्री सुरेश चंद्र गुप्ता जी ने कथा का पूर्ण श्रद्धा एवं समर्पण के साथ रसपान किया। जिले के कोने- कोने से आए हजारों की संख्या में श्रोता भागवत कथा का रसपान किया। कथा पंडाल में श्री जगदीश चंद्र ग्रह गणेश साहू सोमेश गुप्ता आशीष यादव डॉक्टर गंगाधर शुक्ला निशा कांत द्विवेदी डॉक्टर देवेंद्र मिश्रा शंभूनाथ गुप्ता दिलीप सिंह जय कृष्ण साहू राकेश सिंह आनंद स्वरूप सिंह शेषमणि पांडे श्रीमती रीता जयसवाल सारिका सोनी चेतना साहू प्रतिमा साहू ममता गुप्ता शिल्पी रजनी साहू आदि हजारों की संख्या में नगर के गणमान्य नागरिकों ने कथा का रसपान किया मंच का संचालन श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ समिति के अध्यक्ष शशांक सिंह रानू ने किया व्यवस्था प्रमुख पंडित आनंद मिश्रा जी ने कोवीड प्रोटोकॉल के पालन का सार्थक प्रयास किया। आयोजन को व्यवस्थित करने में श्री दिनेश गुप्ता चंदन साहू सोनी सौर्य सरस्वती कपिल चतुर्वेदी अक्षत मिश्रा विद्यार्थी जी आदि का  महत्वपूर्ण योगदान रहा

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