अवर अभियंता का वेतन कटा , चिकित्साधिकारियों को मिली चेतावनी

जौनपुर। कलक्ट्रेट सभागार में शुक्रवार को जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में हुई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की गई। निर्माण कार्य में प्रगति कम होने तथा बैठक में अनुपस्थित रहने पर चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के अवर अभियंता का एक दिन का वेतन काटने तथा स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया। 

 अभियान के दौरान आयुष्मान कार्ड बनने पर तथा आयुष्मान कार्ड के माध्यम से मरीजों का इलाज कम होने पर जिलाधिकारी ने धर्मापुर और मड़ियाहूं के प्रभारी चिकित्साधिकारियों पर नाराजगी जताई और उन्हें चेतावनी देते हुए स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने महीने में 50 से भी कम इलाज करने वाले सभी ब्लॉक चिकित्सालयों को इसमें सुधार करने के लिए चेतावनी दी। इसके लिए धर्मापुर, करंजाकला, खुटहन, सिकरारा और सोंधी की स्वास्थ्य इकाइयों के प्रतिनिधियों पर नाराजगी जताई।
 जननी सुरक्षा योजना में भी उपलब्धि कम रहने पर नाराजगी जताई।  वित्तीय सूचना उपलब्ध न करा पाने के लिए जिला लेखा प्रबंधक से स्पष्टीकरण मांगा। साथ ही भविष्य में वित्तीय अनियमितता रोकने के लिए मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने का निर्देश दिया ताकि लेखा-जोखा का आडिट होता रहे और अनियमितता से बचाव हो सके। 
 जिलाधिकारी ने जनपद की सभी स्वास्थ्य इकाइयों पर शत-प्रतिशत दवा की उपलब्धता सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी दशा में बाहर की दवाइयां मिलने तथा बाहर से जांच होने पर गंभीर परिणाम होंगे। ऐसी स्थिति में संबंधित चिकित्साधिकारी पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जायेगी। जिलाधिकारी ने कहा कि बुधवार और शनिवार को होने वाला ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) समाज में एक आदर्श स्वास्थ्य व्यवस्था के तौर पर स्थापित हो। वीएचएसएनडी पर ही गर्भवती व नवजात को सारी जांच व इलाज की सुविधा मिल सके। 
सारे प्रभारी चिकित्साधिकारियों (एमओआईसी) से उन्होंने कहा कि वह वीएचएसएनडी के दौरान ब्लड, यूरिन, शुगर जैसी बेसिक जांचों की सुविधा उपलब्ध करायें। वीएचएसएनडी की बैठक नियमित रूप से हो, उसका रजिस्टर मेंटेन किया जाये, रजिस्टर में ही सारी चीजें दर्ज की जायें। उन्होंने कहा कि गृह आधारित नवजात की देखभाल (एचबीएनसी) भी नवजात और गर्भवती के स्वास्थ्य में काफी सहयोगी हैं। आशा कार्यकर्ता और एएनएम के माध्यम से उनकी मानीटरिंग की जानी चाहिए। आशा और एएनएम के फीडबैक के आधार पर नवजात की ठीक से देखभाल कराना सुनिश्चित करें। जिससे उनके फीडबैक के आधार पर नवजात की देखभाल के लिए जरूरी कदम उठाया जा सके। आशा और एएनएम अपनी विजिट के दौरान सारे पैरामीटर्स पर चेकिंग करें जिससे कोई दिक्कत हो तो नजदीकी प्राथमिक (पीएचसी)/सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर उनका इलाज कराया जा सके। उन्होंने अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (एसीएमओ) डॉ राजीव कुमार को रेडक्रॉस सोसायटी का रिकॉर्ड मेन्टेन करने का निर्देश दिया। साथ ही मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ लक्ष्मी सिंह को स्वयं की देखरेख में मीटिंग आयोजित कराने को कहा। उन्होंने सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगवाने के निर्देश दिये, जिसे जनपद से निगरानी की जा सके। जिलाधिकारी द्वारा डीसीपीएम को निर्देशित किया गया कि जनपद की क्रियाशील हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर पर सभी सूचनाएं डिस्प्ले की जाए और फंड के अभाव में जो क्रियाशील नहीं हो पा रही है उसके लिए धन की मांग की जाए। 
उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया कि हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर की मॉनिटरिंग की जाए और सभी सीएचसी/पीएचसी पर साफ-सफाई का बेहतर इंतजाम हो, उपलब्ध उपकरण सक्रिय स्थिति में रहे। कोरोना टीकाकरण के संदर्भ में जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉक्टर नरेंद्र सिंह को निर्देशित किया कि अभियान चलाकर 12 से 14 वर्ष और 15 से 17 वर्ष के युवाओं का टीकाकरण करवाएं और कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करवने के साथ ही टेस्टिंग की क्षमता को बढ़ाया जाय, उन्होंने कहा कि कोरोना के प्रति लापरवाही की दशा में गम्भीर परिणाम हो सकते है अतः हम सभी को कोरोना संक्रमण से बचाव के सभी उपाय अपनाने चाहिए। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अनुपम शुक्ला, सीएमओ डॉ लक्ष्मी सिंह, सभी एसीएमओ, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी, पंचायतीराज अधिकारी, जिला पूर्ति अधिकारी आदि मौजूद रहे।

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