पढ़ाई में मददगार बनी मुख्यमंत्री बालसेवा योजना

 जौनपुर। शाहगंज क्षेत्र की 10वीं की छात्रा रीता (बदला हुआ नाम) की मां का  मई 2021 में कोविड के चलते निधन हो गया था। उस वक्त तो एक बारगी लगा कि आर्थिक तंगी के चलते पढाई अब शायद न हो सके। इसी बीच रीता को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना की जानकारी हुई। उसने योजना में आवेदन किया, जिसे स्वीकार कर लिया गया। उसे अब चार हजार रुपये महीने के हिसाब से तीन-तीन महीने पर 12 हजार रुपये मिल रहे हैं। अभी तक उसे दो भुगतान प्राप्त हुए है, जिसमें तीन-तीन महीने के 12-12 हजार रुपये थे। रीता के पिता ने बताया कि इन रुपयों का उपयोग कापी-किताब खरीदने, स्कूल फीस तथा ट्यूशन फीस भरने, ड्रेस व जूते खरीदने में किया। इन रुपयों से उसकी पढ़ाई की राह में आने वाली दिक्कतें खत्म हो गईं हैं।

केस-2
                 सदर क्षेत्र के नितिन (बदला हुआ नाम) के पिता का 19 अप्रैल 2021 को कोविड के चलते निधन हो गया। पिता के न रहने का असर उसकी पढ़ाई-लिखाई पर भी पड़ा। उसे स्कूल फीस भरने तथा कापी-किताब की व्यवस्था करने में दिक्कतें आने लगीं। 18 वर्ष से कम उम्र होने के कारण नितिन ने “मुख्यमंत्री बालसेवा योजना” के लिए फार्म भरा। योजना में नाम स्वीकृत होने पर उसे हर माह चार-चार हजार रुपये की धनराशि मिल रही है। इससे उसे हाईस्कूल की परीक्षा देने और किताब-कापी खरीदने में सहूलियत मिली। इस योजना के लिए दोनों बच्चों ने मुख्यमंत्री का आभार जताया है।
                 जिले की महज रीता और नितिन को ही इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। एक मार्च 2020 के बाद कोविड के चलते माता-पिता दोनों या किसी एक को खोने वाले जनपद के 152 बच्चों को सरकार “मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना” के तहत प्रतिमाह 4000 रुपये प्रदान कर रही है। इससे वह अपनी पढ़ाई-लिखाई की जरूरतें पूरी कर रहे हैं।
              कौन पा सकता है लाभ - जिला प्रोबेशन अधिकारी अभय कुमार का कहना है कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का लाभ उन्हीं बच्चों को मिल सकता है जो कि उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हों। एक परिवार के सभी बच्चों (जैविक तथा कानूनी रूप से गोद लिये गये) को योजना का लाभ मिल सकता है। योजना का लाभ 18 वर्ष तक की उम्र के उन्हीं बच्चों को मिलता है जिनके माता-पिता दोनों की मृत्यु कोविड-19 संक्रमण से महामारी के दौरान हुई हो। माता-पिता में से एक की मृत्यु एक मार्च 2020 से पहले हुई हो तथा दूसरे की मृत्यु कोविड-19 संक्रमण से महामारी के दौरान हुई हो। ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता दोनों की मृत्यु एक मार्च 2020 से पूर्व हुई थी तथा उनके वैध संरक्षक की मृत्यु कोविड-19 संक्रमण से महामारी के दौरान हो गई हो। लाभार्थी बच्चों की दूसरी श्रेणी में ऐसे सभी बच्चों को शामिल किया गया है जिन्होंने कोविड-19 के कारण अपने माता-पिता में से आय अर्जित करने वाले अभिभावक को खो दिया हो तथा वर्तमान में जीवित माता या पिता सहित परिवार की आय दो लाख रुपये प्रतिवर्ष से अधिक न हो।
                 यह मिलती है सहूलियत - ऐसे 10 वर्ष तक की आयु के बच्चों के वैध संरक्षक के बैंक खाते में 4,000 रुपये प्रतिमाह की धनराशि भेजी जाती है, बशर्ते औपचारिक शिक्षा के लिए उनका पंजीयन किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय में कराया गया हो। ऐसे बच्चे जो पूरी तरह से अनाथ हो गये हों अथवा बाल कल्याण समिति के आदेश से विभाग के अंतर्गत संचालित बाल्य देखभाल संस्थाओं में आवासित कराए गये हैं, उन्हें छठीं से 12वीं तक की शिक्षा के लिए अटल आवासीय विद्यालयों तथा कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में प्रवेशित कराया जाता है। 11 से 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों की कक्षा 12 तक नि:शुल्क शिक्षा के लिए अटल आवासीय विद्यालयों तथा कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में प्रवेश कराया जाता है। विद्यालयों की तीन माह की अवकाश अवधि के दौरान बच्चों की देखभाल के लिए प्रतिमाह 4,000 रुपये की दर से कुल 12,000 रुपये की धनराशि बच्चे के वैध संरक्षक जिसकी अभिरक्षा में बच्चा है, उसके बैंक खाते में स्थानांतरित की जाती है। यह धनराशि कक्षा 12 तक या 18 वर्ष की आयु पूरी होने तक जो भी पहले हो जाती है, उसे होने तक देय होती है। किसी कारणवश यदि बच्चों के संरक्षक इन आवासीय विद्यालयों में प्रवेश नहीं दिलाना चाहते तो बच्चों की देखरेख व शिक्षा के लिए उन्हें 18 वर्ष की आयु होने अथवा कक्षा 12 तक की शिक्षा पूरी होने तक 4,000 रुपये की धनराशि दी जाती है। बशर्ते बच्चे की औपचारिक शिक्षा के लिए अनिवार्य रूप से किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय में प्रवेश दिलाया गया हो

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