एक दम्पत्ति ने अपनी शादी सालगिरह किया पुरानी परम्परा का निर्वहन

जौनपुर। अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस की पूर्व संध्या पर इको- फ्रेंडली शादी सालगिरह का आयोजन शनिवार की देर रात किया गया। मामला विकास खंड मछलीशहर की ग्राम पंचायत बामी का है जिसमें एक दम्पत्ति ने अपनी शादी की 9 वीं सालगिरह का आयोजन शून्य कार्बन उत्सर्जन नीति को यथासंभव आधार बनाते हुए , पलाश( ढाक) के बने पत्तलों और दोने में ग्रामवासियों को भोजन कराया। पानी और लस्सी के लिए मिट्टी के बने कुल्हड़ एवं परवे का प्रयोग किया ।

भोजन में देशी व्यंजनों एवं फलों का प्रयोग किया गया। दम्पत्ति की दिली इच्छा थी कि वे अपनी शादी की सालगिरह अपने द्वारा लगाये और सींचे गये पौधों के बीच में ही मनाये, इसके लिए उन्होंने सामुदायिक भवन परिसर बामी को कार्यक्रम स्थल के रूप में चुना। जिसमें 100 से अधिक पौधे जिनकी देखभाल में दम्पत्ति स्वयं विगत 3 वर्षों से करते आ रहे हैं , जो बराबर सिंचाई के चलते मई महीने की भीषण गर्मी में भी इस समय हरे - भरे हैं। उन्हें इस अवसर पर कार्यक्रम के लिए आकर्षक ढंग से सजाया गया था।

आपको बताते चलें कि जुलाई- अगस्त महीने में वृक्षारोपण अभियान व्यापक पैमाने पर चलाया जाता है किन्तु मई - जून की झुलसा देने वाली गर्मी में पौधों की सिंचाई कार्य आज भी जनांदोलन का रुप नहीं ले सका है, जिस कारण रोपित ज्यादातर पौधे सूख जाते हैं। पेड़ - पौधे जैव विविधता के अंग होने के साथ - साथ जैव विविधता के आधार भी हैं।जैव विविधता आज भी उन्हीं क्षेत्रों में कायम है जहां आज भी पर्याप्त संख्या में पेड़ - पौधे कायम हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आने वाले समय में पौधे के रोपण के साथ - साथ मई जून के महीने में उनकी सिंचाई का कार्य भी क्या जनांदोलन रुप ले सकेगा? टैंकर भी बुल्डोजर के समकक्ष दर्जा पायेगा ?

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