ग्राम पंचायतों का एक वर्ष का कार्यकाल पूरा, जानिए कितना हुआ बदलाव

 जौनपुर। गत वर्ष में ग्राम पंचायत का चुनाव पूरे होने के बाद 2 मई को मतगणना पूरी हुई और कोरोना के चलते शपथ ग्रहण के कार्य में देरी हुई,जिन पंचायतों के सदस्यों का कोरम पूरा था वहां 25 और 26 मई को शपथ ग्रहण करवाया गया और 27 मई की प्रथम बैठक के साथ ही नवीन ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारम्भ हुआ।गत वर्ष में पंचायतों के बारे में शासन एवं जिले स्तर पर अनेक कदम उठाए गए। शासन स्तर पर ग्राम प्रधानों का मानदेय 3500 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपए किया गया। ग्राम पंचायत सदस्यों को भी प्रति बैठक 100 रुपये अधिकतम 12 बैठकों के लिये धनराशि देने का प्रावधान किया गया।

 कार्यकाल के दौरान ग्राम प्रधान एवं पंचायत सदस्य की मृत्यु पर उनके आश्रित को क्रमशः 10 लाख और 2 लाख रुपए की राशि देने का प्रावधान किया गया साथ ही पंचायतों के वित्तीय अधिकारों में भी परिवर्तन किया गया,लेकिन इस बीच पंचायतों पर कुछ विशेष निश्चित खर्चे भारित किये गये जैसे पंचायत सहायक के लिए 6000 मासिक तथा सामुदायिक शौचालयों की सफाई और रख रखाव के लिये 9000 रुपए मासिक का खर्च करना पड़ रहा है जिससे कम जनसंख्या वाली छोटी ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों के लिये कम धनराशि बच रही है बड़ी ग्राम पंचायतों पर इसका प्रभाव सीमित है। विगत वर्ष में पंचायत भवनों की मरम्मत एवं नव निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है। पंचायत सहायकों की नियुक्ति से पूर्णकालिक कर्मचारी के न होने पर पंचायत भवनों के ताले जो विशेष अवसरों पर ही खुलते थे वे अब नियमित कार्यालय की भांति कार्य कर रहे हैं। इससे पंचायतों के प्रशासनिक कार्यों में कुछ सीमा तक सुधार हुआ है। ग्रामीण सफाई कर्मचारियों की हाजिरी के सम्बन्ध में मुख्य विकास अधिकारी जौनपुर अनुपम शुक्ला द्वारा सफाई कर्मचारियों को अपने मोबाइल में ऐप डाउनलोड कर हाजिरी लगावाने के लिये प्रयास किया गया किन्तु सफाई कर्मचारी संघों ने इसे शासनादेश विरोधी करार देते हुए विरोध प्रदर्शन किया जिसके चलते मुख्य विकास अधिकारी को बैक फुट पर जाना पड़ा किन्तु पंचायत सहायकों की नियुक्ति के शासनादेश में स्पष्ट उल्लेख है कि पंचायत सहायकों की नियुक्ति के बाद प्रत्येक पंचायत भवन पर कम्प्यूटर के माध्यम से सफाई कर्मचारियों की हाजिरी लगाई जायेगी और ग्राम पंचायत में यदि एक से अधिक राजस्व गांव हैं और प्रत्येक राजस्व गांव के लिए अलग सफाई कर्मचारी हैं तो पंचायत भवन की सफाई में सभी सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी रोस्टर बनाकर लगाई जायेगी किन्तु पंचायत सहायकों की नियुक्ति के पांच माह बाद भी जनपद जौनपुर में इस शासनादेश को अमलीजामा नही पहनाया जा सका है। सफाई कर्मचारियों का कार्य वितरण भी पूरी तरह से अवैज्ञानिक है। 50 जनसंख्या वाले राजस्व गांव के लिए भी एक ही सफाई कर्मचारी और 5000 जनसंख्या वाले वाले गांव के लिए भी एक ही सफाई कर्मचारी। इसका परिणाम यह होता है कि ज्यादातर सफाई कर्मचारी ऐसे ही गांव में पोस्टिंग चाहते हैं जिस गांव में विद्यालय, पंचायत भवन जैसे सार्वजनिक स्थल न हो और गांव की जनसंख्या कम से कम हो। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब समान काम के लिए समान वेतन होता है तो समान वेतन के लिए समान काम भी होना चाहिए परन्तु विगत 12 वर्षों से शासन- प्रशासन स्तर इस मुद्दे पर कोई विचार नहीं किया गया। गांव की आशा बहुएं और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों में कार्य वितरण घरों के क्लस्टर के आधार पर होता है न कि राजस्व गांव के आधार पर अतः सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्य वितरण को वैज्ञानिक बनाने के लिए व्यापक सुधार की आवश्यकता आज भी बनी हुई है।

अगर पंचायतों के विकास कार्यों पर गौर करें तो अपने सामान्य विकास कार्यों के साथ -साथ ज्यादातर ग्राम पंचायतों ने स्कूलों के कायाकल्प के पैरामीटर का कार्य पूरा कर लिया है, ज्यादातर ग्राम पंचायतों में खेल के मैदान का कार्य पूरा हो गया है। अमृत सरोवर योजना के तहत तालाबों की खुदाई कार्य प्रगति पर है।

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