न्यूज पोर्टल का सरताज है शिराज-ए-हिन्द डाट काम : विकास तिवारी

वेब न्यूज को हिन्दुस्तान में आये भले ही दो दशक बीत गया हो , लेकिन मैने लगभग दस वर्ष पूर्व वेब न्यूज के बारे में ढंग से सुना और आठ साल पहले वेब न्यूज को ढंग से जाना वो भी शिराज-ए-हिन्द डाट काम के माध्यम से, शिराज-ए-हिन्द डाट काम को और इस न्यूज पोर्टल के बास बडे़ भाई राजेश श्रीवास्तव जी को - निर्भीक, सच्ची, ईमानदारी पूर्ण,सबसे तेज, सबसे पहले, सारे दबाओं व प्रभाओं को नजरअंदाज कर निष्पक्ष पुरे जिले की खबर हम जैसे लोगों तक पहुचानें के लिए विशेष धन्यवाद एवं सफलता पूर्वक आठ वर्ष पुरे करने के लिए आकाश भर बधाई, आज जब भी कोई ब्रेकिगं न्यूज जौनपुर जिले की जाननी होती है तो सीधे हर कोई www.shirazehind.com को टच करता है ,सच कहा जाय तो न्यूज पोर्टल का सरताज बन गया है शिराज-ए-हिन्द डाट काम।

 www.shirazehind.com को पढ़ कर मैने यह महसूस किया और जाना की - वेब पत्रकारिता को शुरु हुए समय भी जादा नहीं हुआ है। सन 1995 से इसकी शुरुआत हिंदू अखबार के ई-संस्करण से हुई थी। यानी कम समय में तरक्की का मुकाम वेब पत्रकारिता पाया है।वेब पत्रकारिता के कारण आज सूचना और समाचार के क्षेत्र में काफी परिवर्तन नजर आता है। तकनीकी परिवर्तन हो रहे है। हर पल की ताजा खबर वेब पत्रकारिता के माध्यम से देखी जा सकती है। उसी के कारण आज हमारी संस्कृती भी ’टेक्नो संस्कृती’ के नाम से जाने जानी लगी है। मै मानता हुं कि – ’’इंटरनेट प्रचार का नहीं संचार का माध्यम है। इसमें बहुस्तरीय संचार होता है। वेब मीडिया एक ऐसा माध्यम बन गया है जिसकी कोई सीमा भी नहीं है। या किसी भौगोलिकता का बंधन भी उस पर नहीं है। हाॅ…तकनिकी विकास के कारण यह वेब मीडिया हमारे सामने आया तब से मानो मीडिया की भूमिका ही बदल गई है।प्रिट मीडिया या इलेक्टिकल मीडिया की अपेक्षा वेब मीडिया का पाठक वर्ग कुछ भिन्न स्तर का है। ज्यादातर युवा वर्ग इस वेब मीडिया का पाठक है। सामान्य पाठक वर्ग की तरह इनकी विचार शैली नहीं होती है। वैष्विकरण में जी रहे नवयुवक अधिक बुध्दिवादी हो गये है। आज किसी के पास समय भी नहीं है।सब अपनी भागदौड में मस्त है। अखबार पढने का समय भी नहीं है। इसी में अपने काम से कुछ समय जुटाकर विभिन्न वेबसाइटों को यह वर्ग देखता है। मै समाचार पत्रो को नजरअंदाज करने की बात नही कर रहा हुं,भारत में अंग्रेजों के आने के पहले तक समाचार पत्रों का प्रचलन नहीं था। अंग्रेजों ने ही भारत में समाचार पत्रों का विकास किया। सन 1780 में कलकत्ता से भारत का सबसे पहला समाचार पत्र प्रकाशित किया गया जिसका नाम था "दी बंगाल गैजेट" जिसका सम्पादन जेम्स हिक्की ने किया था। यही वो क्षण था जब से भारत में समाचार पत्रों का विकास हुआ। आज भारत में विभिन्न भाषाओँ में समाचार पत्र प्रकाशित किये जा रहे हैं। समाचार पत्र से हमें अनेक लाभ होते हैं। समाचार पत्रों से हमें नवीन ज्ञान मिलता है। नए अनुसन्धान, नयी खोजों की जानकारी हमें समाचार पत्रों से ही मिलती है। इसमें प्रकाशित होने वाली सरकारी सूचनाओं, आज्ञाओं और विज्ञापनों से हमें आवश्यक और महत्वपूर्ण जानकारी समाचार पत्रो के माध्यम से मिल जाती है।

 यह कहना गलत नहीं होगा की आज भी समाचार पत्रों का जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। समाचार पत्र के लाभ और हानि का सारा भार संपादक के ही ऊपर निर्भर होता है। अतः उसे महत्त्व को अच्छे से समझना चाहिए। यदि वे धर्म, जाती, निजी लाभ जैसे विषयों को छोड़कर ईमानदारी से अपना काम करे तो वे वास्तव में देश की सच्ची सेवा कर सकते हैं जो www.shirazehind.com के संपादक बडे भाई राजेश श्रीवास्तव बखुबी कर रहे है। बडे़ भाई आपके जज्बे को प्रणाम |

 .......विकास तिवारी एडवोकेट 9670669669

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