बसुही नदी के किनारे मंडरा रहे है सारस के झुण्ड

 

जौनपुर। सबेरे - सबेरे मड़राते हैं बसुही नदी किनारे सारस के झुण्ड आम तौर पर आज के समय में चिड़ियों के झुण्ड कम ही दिखाई देते हैं किन्तु बरसात में नदी के किनारे के बामी, भटेवरा, कठार गांवों के ताल तलैया और पानी भरे खेतों में अभी भी पक्षियों के झुण्ड सबरे सबरे देखने को मिल जाते हैं।भोजन की तलाश में सबेरे सबेरे ताल तलैया में झुण्ड मड़राते नजर आ जाते हैं। गर्मियों के मौसम में ये यदा कदा ही दिखते हैं लेकिन बारिश में इनकी संख्या बढ़ जाती है और ये बहुतायत दिखाई देने लगते हैं। यह विकास खंड मछलीशहर के चितांव गांव का मंगलवार की सुबह का दृश्य है। जंगलों के अंधाधुंध कटाई, पुराने तालाबों के पट जाने से तथा फसलों में कीटनाशकों के प्रयोग से इनकी संख्या पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सारस अक्सर दलदली भूमि एवं पानी भरे खेतों में अक्सर भोजन तलाश करते दिखाई पड़ जाते हैं। वैसे तो भारत में सारस की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। जिसमे लाल गर्दन वाली सफेद रंग की सारस की प्रजाति सबसे खूबसूरत होती है ग्रामीण इलाकों में पायी जाने वाली प्रजाति को कामन क्रेन कहा जाता है।

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