जिला कारागार का निरीक्षण कर दिये गये आवश्यक निर्देश

 

जौनपुर। विवेक विक्रम सचिव (पूर्णकालिक) जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने बताया कि उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के सदस्य सचिव संजय सिंह ने विशेष कार्याधिकारी भागीरथ वर्मा एवं सचिव विवेक विक्रम की उपस्थिति में जिला कारागार का औचक निरीक्षण किया। 

इस मौके पर जेलर कुलदीप सिंह भदौरिया ने बताया कि जिला कारागार में कुल 1182 बन्दी है जिनमें 188 पुरूष तथा 07 महिला सिद्धदोष बन्दी हैं तथा 863 पुरूष तथा 50 महिलाएॅं एवं 43 अल्पवयस्क विचाराधीन बन्दी तथा प्रशासनिक आधार पर अन्य कारागार से प्राप्त बंदियों की संख्या 30 है। कारागार में निरूद्ध महिला बन्दियों के साथ कुल 08 बच्चे हैं। उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के सदस्य सचिव संजय सिंह ने कारागार में साफ-सफाई को इंगित करते हुए व्यवस्था का कड़ाई से पालन करने हेतु जेलर कुलदीप सिंह भदौरिया को निर्देशित किया। जेलर ने यह भी बताया कि बन्दियों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण हेतु जिला चिकित्सालय से चिकित्सकों की एक टीम का गठन भी किया गया है जिनके द्वारा प्रत्येक बुधवार को बन्दियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। जेल अधीक्षक को यह भी निर्देशित किया कि वह मुख्य चिकित्साधिकारी से सामंजस्य स्थापित करते हुए बंदियों की एच0आई0वी0 की जॉच नियमित अंतराल पर कराना सुनिश्चित करें। इस दौरान जिला कारागार में निरूद्ध एक विकलांग व्यक्ति पाया गया जिसका नाम विजलेश पुत्र रामगुलाब निवासी ठाठर थाना आसपूर देवसरा जिला प्रतापगढ है। वह धारा 366, 376, 120 आईपीसी जिला जौनपुर के प्रकरण में जिला कारागार में निरूद्ध है जिसके संबंध में चिकित्साधिकारी डा0 रविराज ने बताया कि उक्त बंदी 80 प्रतिशत शारीरिक रूप से विकलांग है तथा चलने फिरने में असमर्थ है। उक्त बंदी को दैनिक क्रिया कलाप करने हेतु भी किसी अन्य व्यक्ति की आवश्यकता पड़ती है जिस पर सदस्य सचिव ने नाराजगी जताते हुए उसको विधिक सहायता हेतु सचिव पूर्णकालिक जौनपुर को निर्देशित किया। उक्त बंदी के संबंध में चिकित्साधिकारी डा0 रविराज से आख्या लेते हुए उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ को विस्तृत आख्या प्रेषित करने हेतु सचिव को निर्देशित किया गया तथा इसके अतिरिक्त बंदियों को दिये जाने वाले भोजन की गुणवत्ता स्तरहीन पायी गयी तथा जेलर को कडाई से निर्देशित किया गया कि बंदियों को उचित गुणवत्ता के भोजन दिलायें जाने की समुचित व्यवस्था करें। उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव संजय सिंह ने बताया कि ऐसे विचाराधीन बन्दी जो अपने वादों में पैरवी हेतु अधिवक्ता करने में अक्षम है तथा ऐसे सिद्धदोष बन्दी जो अपने मामलों में उच्च न्यायालय में अपील करने में अक्षम हों, वह कारागार अधीक्षक के माध्यम से अपने प्रार्थना पत्र जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में प्रस्तुत कर निःशुल्क अधिवक्ता प्राप्त कर सकते हैं। कैदियों के नाबालिक होने की संभावना को देखते हुए जन्म प्रमाण पत्र मंगवाने की सलाह दी गयी। समय पूर्व रिहाई के पात्र बन्दियों को चिन्हित कर उनके प्रार्थना पत्र तैयार कर नियमानुसार अग्रिम कार्यवाही हेतु प्रेषित किये जाने हेतु निर्देशित किया गया। जेलर ने बताया कि वर्तमान में कारागार स्तर पर किसी भी सिद्धदोष बन्दी की जेल अपील लम्बित नहीं है। सभी बंदियों की अपील की जा चुकी है। इस अवसर पर जेलर कुलदीप सिंह भदौरिया, डिप्टी जेलर राजकुमार सिंह, धर्मेन्द्र सिंह, सुषमा शुक्ला, चिकित्साधिकारी डा0 रविराज, फार्मासिस्ट सतीश गुप्ता, जेल पीएलवीगण सहित अन्य उपस्थित रहे।

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