समाजिक चेतना अभियान की पहचान
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समाजिक
चेतना अभियान का पहचान राजू ओझा के तहत कुछ इस तरह से है। मैं एक गांव में
एक से बढकर एक धन्यवान लोगों को देखा एक दिन कुछ ऐसे लोग मिले जो कि अपने
गाँव में एक समाज बनाना चाहते थे।उस गांव में एक से बढ कर एक बहुत ही
धन्यवान लोग थे।उसी गाँव के एक आदमी ने समाजिक चेतना अभियान के उपलब्धि को
देखा और उस आदमी को ये समझ में आया कि मेरे भी गांव में एक बार विकास
कार्य के लिए एक समिति गठित की जाय उसमें प्रशन ये आया कि इस समिति का
मुखिया कौन होगा तो उस आदमी ने अपने पुरे गाँव के लोगों के पास गया और
बताया कि इस गांव का एक मुखिया रहना चाहिए जो इस छोटे से गांव का विकास कर
सके हला की मै आपको बता दूं कि उस गाँव में मात्र 9 ही घर था।एक दिन उस
गांव में एक बैठक किया गया जिसमें उस गांव के सभी लोग उस बैठक में सामील
हुऐ और सभी ने अपना बहुमूल्य समय भी दिया ।रहा बात ये कि उसमें सबसे ज्यादा
अधिक संपत्ति वाले लोग 9 ही थे गरीब वहां कोई था नहीं मात्र गरीब एक उस
गांव में एक नाई था जो हर घर में जाता है। और उसी गांव में सबसे नीचे एक
नंबर पर रहने वाला आदमी समाजिक चेतना अभियान को जान रहा था।अब बात करें उस
बैठक के दौरान क्या हुआ।
तो उसमें जो सबसे धन्यवान आदमी था उसने पूछा कि
ये बैठक किस बात के लिए बुलाया गया है।तो सबसे निचले स्तर पर रहने वाले एक
नंबर का कहना था कि ये बैठक इस लिए बुलाया गया है कि इस गांव एक मुखिया
हमलोगों के बीच रहे और हम सभी का विकास करे और मिलजुलकर इस गांव का विकास
किया जाय ।तो इस बात से आपलोग सहमत हैं। तो सभी गांवों के लोगों का कहना था
कि जी सहमत हैं।तब अब बात सामने आयी कि इस लायक कौन है जो उस गांव में सबसे ज्यादा धन्यवान आदमी था उसका कहना था कि मै इस गांव में सबसे ज्यादा ताकतवर और
धन्यवान हुॅ मेरे लायक तो कोई नहीं है।येही बात अपने निचले स्तर पर सबने कहा नतीजा ये हुआ कि आठवां आदमी सातवां आदमी से कहा मेरे से अच्छा कौन है। सातवां ने छठवां से कहा छठवां ने पांचवां से कहा मुझसे बडा कौन है इसी तरह पांचवां ने चौथा से कहा चौथा ने तिसरा सेे तिसरा ने दुसरा सेे दुसरा ने पहला से कहा मेरे से सभ्य और समाजसेवी और कौन है पहला आदमी बेचारा खामोश हरेक व्यक्ति का बात सुन रहा था। सबका बात सुनने के बाद उसको समझ में आया कि मैं सबसे बेकार और समय गवाने वाला मनुष्य हुॅ तब उसने क्या किया आप सुनेंगे तो आपका भी थोडी देर के लिए दिमाग हैरान हो जाएगा कि ये आदमी चला था अपने गांव का विकास करने मगर उसका कोई भी व्यक्ति साथ नहीं दिया मगर मैं बता दूं कि उस आदमी ने संकल्प लें लिया था कि हमें गांव का विकास करना है तो करना है। वो आदमी ने ठीक उसी समय अपने गाँव के नाई भाई के पहुंचा और बोला भाई आपकी मुझे सख्त जरूरत है उस नाई ने कहा मालिक क्या होगया कि आज मेरी जरूरत पड गई। उस आदमी ने कहा भाई आओ मैं बताता हूँ उस नाई भाई को वहां लाया उसने जहां सभी धन्यवान और गणमान्य लोग उपस्थित थे। और नाई भाई के कंधे पर हाथ रख कर कहा मै अब ग्यारह हो गया अब मैं इस गांव का विकास करने में सक्षम हुॅ। बाकी सभी को हैरान कर दिया उस एक नंबर वाला आदमी और सही मे उस गांव का विकास करके दिखाया और आज भी कर करने का प्रयास कर रहा है उस मनुष्य उस गांव का भगवान रुपी इनसान का नाम नहीं रखूंगा आज ही नहीं कभी भी क्योकि उस आदमी को नाम नहीं चाहिए मात्र काम करने पर भरोसा करता है और मात्र रिजल्ट आपसे क्या आया उस पर विश्वास करता है उसका नाम है समाजिक चेतना अभियान और इसी माध्यम से मैं समाजिक चेतना अभियान को जानता हूं इसमें आपकी क्या राय है।
