जौनपुर। इस भीषण गर्मी में डिहाइड्रेशन व हीट स्ट्रोक आदि बीमारियों के खतरे के प्रति लोग सजग है। लेकिन अधिक गर्मी के कारण कडनी में पथरी की समस्या हो सकती है। इसके प्रति सजग रहने की जरूरत है। तापमान में वृद्धि होने से किडनी में पथरी की संभावना बढ़ती है। दर असल तापमान में बढ़ोत्तरी की वजह से पानी की कमी बढ़ जाती है। जिसके कारण गुर्दे में पथरी के मरीजों की संख्या बढ़़ जाती है। चिकित्सकों को कहना है कि ऐसा इसलिये होता है जब पसीने द्वारा पानी की कमी को पूरा करने लोग आवश्यक मात्रा में पानी नहीं पीते । पानी की कमी की वजह से मूत्र में सघनता बढ़ जाती है जिससे गुर्दे में पथरी बनने का खतरा बढ़ जाता है। जब लोग कम तापमान के क्षेत्र से अधिक तापमान के क्षेत्र में जाते हैं तो पथरी के खतरे में तीब्र वृद्धि देखी गयी है। क्षेत्र के तापमान में असमानता को भौगोलिक अन्तर के लिए उत्तरदायी ठहराया जाता है। जो पथरी की बीमारी का एक कारण बनता है। महिलाओं के मुकाबले में पुरूषों इस रोग की संक्रामकता तीन गुना अधिक होती है। बच्चे भी प्रभावित हो सकते हैं। 25 प्रतिशत पथरी की बीमारी अनुवांशिक होती है। मूत्र में जमे हुए खनिजों के जमा होने की स्थिति गुर्दे की पथरी को बनाती है। कम मात्रा में मूत्र का होना,तरल पदार्थो को कम पीना और पानी की अत्यन्त कमी इस स्थिति के बढ़ने के कारण है। यही कारण है कि सूखा पड़ने वाले क्षेत्रों में पथरी की बीमारी अधिक होती है।
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रविवार, 19 जून 2016
गर्मी बढ़ा सकती है गुर्दे की पथरी
जौनपुर। इस भीषण गर्मी में डिहाइड्रेशन व हीट स्ट्रोक आदि बीमारियों के खतरे के प्रति लोग सजग है। लेकिन अधिक गर्मी के कारण कडनी में पथरी की समस्या हो सकती है। इसके प्रति सजग रहने की जरूरत है। तापमान में वृद्धि होने से किडनी में पथरी की संभावना बढ़ती है। दर असल तापमान में बढ़ोत्तरी की वजह से पानी की कमी बढ़ जाती है। जिसके कारण गुर्दे में पथरी के मरीजों की संख्या बढ़़ जाती है। चिकित्सकों को कहना है कि ऐसा इसलिये होता है जब पसीने द्वारा पानी की कमी को पूरा करने लोग आवश्यक मात्रा में पानी नहीं पीते । पानी की कमी की वजह से मूत्र में सघनता बढ़ जाती है जिससे गुर्दे में पथरी बनने का खतरा बढ़ जाता है। जब लोग कम तापमान के क्षेत्र से अधिक तापमान के क्षेत्र में जाते हैं तो पथरी के खतरे में तीब्र वृद्धि देखी गयी है। क्षेत्र के तापमान में असमानता को भौगोलिक अन्तर के लिए उत्तरदायी ठहराया जाता है। जो पथरी की बीमारी का एक कारण बनता है। महिलाओं के मुकाबले में पुरूषों इस रोग की संक्रामकता तीन गुना अधिक होती है। बच्चे भी प्रभावित हो सकते हैं। 25 प्रतिशत पथरी की बीमारी अनुवांशिक होती है। मूत्र में जमे हुए खनिजों के जमा होने की स्थिति गुर्दे की पथरी को बनाती है। कम मात्रा में मूत्र का होना,तरल पदार्थो को कम पीना और पानी की अत्यन्त कमी इस स्थिति के बढ़ने के कारण है। यही कारण है कि सूखा पड़ने वाले क्षेत्रों में पथरी की बीमारी अधिक होती है।

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