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रविवार, 10 जुलाई 2016

अभिभावकों की दुश्वारियां बढ़ी

   जौनपुर। बेहतर और संस्कारवान शिक्षा के नाम पर  कुकुरमुत्ते की तरह स्कूल-कालेज खुल उठे है। जिनके द्वारा अभिभावकों को खूब सब्जबाग दिखाये जा रहे है। जिसका सीधा सा असर अभिभावकों के जेब पर पड़ रहा है। नये शिक्षा सत्र के प्रारंभ होने के साथ ही अभिभावकों की दुश्वारियां भी बढ़ उठी है। अभिभावकों के जेब पर जहां असर हो रहा है वहीं बच्चों के पीठ पर शिक्षा के नाम भार बढ़ा दिया गया है जिसे वह ढोने को विवश है। यही कारण है कि नये शिक्षा सत्र के प्रारंभ होने के बाद अभिभावकों की समस्याओं में भी इजाफा हो गया है।  इन दिनों नगरीय इलाकों से लेकर ग्रामीण इलाकों में षायद ही कोई ऐसा क्षेत्र बचा हो जहां कोई न कोई स्कूल कालेज खुला न हो गया शिक्षा और संस्कार की बेहतरीय की बात तो यह ऐसे करते है मानों इनसे बेहतर कोई है ही नहीं, लेकिन जैसे ही अभिभावकों का पाला इनसे पड़ता है उन्हें बेहतर संस्कार युक्त शिक्षा के नाम पर भारी भरकम फीस, एडमीषन शुल्क के साथ किताबों के भारी भरकम भार का लिस्ट भी थमा दिया जाता है। मजे कि बात है कि किताबों के खरीद में इनका जमकर खेल होता है। किताबें सभी दुकानों पर न होकर किसी खास दुकान या विद्यालय से ही उपलब्ध कराई जाती है। जिसमें कमीषन कर जमकर खेल खेला जाता है। अब बारी आती है स्कूल वाहन की तो इसमें भी अभिभावकों का जमकर आर्थिक शोषण किया जाता है, बच्चों को  घर से स्कूल ले आने और ले जाने के नाम पर वाहनों में ठूंस कर ढोया जाता है। जिले का शिक्षा महकमा यह सबकुछ देख रहा  है, लेकिन कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठा पा रहा है। 

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