जौनपुर। लगभग डेढ़ माह बाद एक जुलाई से स्कूल खुलेंगे। कुछ ही दिन स्कूलों के खुलने में रह गए हैं। इसके लिए तैयारियां भी की जा रही हैं लेकिन अब तक पाठ्य पुस्तकें ही पूरी नहीं आ पाई हैं। इस स्थिति में नौनिहालों की पढ़ाई कैसे होगी। सिर्फ दो कक्षाओं की किताबें ही अभी तक आ पाई हैं। विभाग अन्य कक्षाओं की किताबें आने का इंतजार कर रहा है। नया शिक्षा सत्र को अप्रैल माह से ही शुरू हो चुका है। बीच में लगभग डेढ़ महीना का गर्मी का अवकाश रहा। अब एक जुलाई से स्कूल खुलने वाले हैं। इसके लिए विभाग तैयारी कर रहा है। इस बार भी यह समस्या है कि किताबें पूरी नहीं आ पाई हैं। सिर्फ कक्षा सात और आठ की किताबें ही आई हैं। कक्षा एक से छह तक की किताबें आनी बाकी हैं। इस लापरवाही का खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है। उनकी पढ़ाई बर्बाद होती है। यह बात अलग है कि शिक्षक व विभाग किसी न किसी तरह से पुरानी किताबों से पढ़ाई करने का प्रबंध कर लेते हैं। किताबें तब आती हैं जब परीक्षा के कुछ माह बाकी रह जाते हैं। अगर समय से किताबें आ जाएं तो पढ़ाई भी ठीक होती रही। इस सत्र में भी वही हाल है। गर्मियों की छुट्टियां खत्म होने को हैं। कुछ ही दिन स्कूल खुलने में बचे हैं लेकिन तैयारियां अभी पूरी नहीं है। किताबें ही नहीं बल्कि ड्रेस व जूते मोजे भी अभी तक नहीं आए हैं। कक्षा एक और छह के लिए स्कूल बैग आ गए हैं। अन्य कक्षाओं के बच्चे बिना बैग के स्कूल जाएंगे। इन स्कूलों में सुविधाएं तो सभी दी जा रही है लेकिन समय पर न मिलने की वजह से इन सुविधाओं के कोई मायने नहीं रह जाते हैं। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा बताया गया हैं कि एक जुलाई से स्कूल खुलेंगे। इसके लिए विभाग सभी तैयारियां कर रहा है। कक्षा सात और आठ की किताबें आ गई हैं। अन्य कक्षाओं की पुस्तकें जल्दी भेजने के लिए प्रकाशकों से कहा गया है। कक्षा एक और छह के लिए स्कूल बैग आ गए हैं। शिक्षकों से भी कहा गया है कि स्कूल खुलने के दो दिन पहले से ही स्कूल खोलकर उनकी साफ सफाई करा लें। जिससे परेशानी का सामना न करना पड़े। विभाग का प्रयास है कि स्कूलों में बच्चों को हर सुविधाएं समय पर मिलें।

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