यह इमोशलन ब्लैक मेलिगं है या सीधे डाका डाला जा रहा है
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जौनपुर। नये शिक्षण सत्र की शुरूआत होने के साथ ही शिक्षा जगत के डाकुओ ने
स्कूल प्रशासन से साठगांठ करके सीधे छात्र-छात्राओं के अभिभावको की जेब पर
खुलेआम दिन दहाड़े डाका डाल रहे है। प्रतिदिन लाखो रूपये की पुस्तके
वेगैर की रसीद पुर्जे की बेच रहे है। किताबो की दाम सुनकर अभिभावको को इस
गर्मी के मौसम में जुड़ी आ रही है। एक अप्रैल से नया शिक्षण सत्र शुरू हो गया है। इस मौके पर छात्र-छात्राओ के अभिभावको को लूटने की ब्लू प्रिन्ट पहले ही प्रकाशक और कान्वेंट स्कूलो ने तैयार कर लिया था। योजना के तहत स्कूल प्रशासन ने पहले किताबे बदल दिया और कीमत भी पिछले वर्ष से तीस से 35 प्रतिशत बढ़ा दिया गया। जैसे ही सीजन की शुरूआत हुआ तो ये शिक्षा जगत डाकू पूर्व योजना के तहत स्टूडेंट्स के पैरेन्ट से राबरी कराना शुरू कर दिया है। छात्र-छात्राओं के परिजन अपने बच्चो की भविष्य सवारने के चक्कर में सब कुछ जानते हुए मौन धारण किये हुए है। ये लोग जहां सीधे जनता की जेबे ढ़ीली कर रहे है वही वेगैर रसीद पुर्जे के किताब बेचकर सरकार को लाखो रूपये का चुना लगा रहे है। हम आपको इसकी एक बनगी दिखाते है सेन्ट पैक्ट्रिक स्कूल की। इस स्कूल के यू के जी के किताबो दाम मैथ की बुक चालिस पन्ने की है जिसकी कीमत 120 रूपये हिन्दी अमृत स्वर नामक किताब का भी दाम है 120 रूपये इसका पन्ना है 27। इग्लिस की बुक है 270 रूपये की पन्ना है 78। CONVERSATION किताब की कीमत है 105 रूपये पन्ना लगा है मात्र आठ,STEPPING STONE IN ENFLISH यह किताब है मात्र 24 पन्ने की कीमत है 105 रूपया । हिन्दी लिखना सिखे किताब 28 पन्ने की है उसकी कीमत रखी गयी है 120 रूपये। बालगीत संग्रह बुक आठ पन्ने की है उसका रेट है 62 रूपये । RHYMES बुक की कीमत 88 रूपये है वह मात्र 12 पन्ने का है। CREATIONS किताब है 26 पन्ने का उसकी कीमत वसूल किया जा रहा है175 रूपये। यानी इस क्लास के बच्चे के केवल किताब की कीमत आयी 1150 रूपये।
आप से अंदाजा लगा लिजिए की इस नामीगिरामी स्कूल किस तरह से प्रकाशको की मिली भगत से छात्र-छात्राओ के अभिभावको को लूट रहे है। इतना ही नही दुकानदार ग्राहको पक्की बिल न देकर कोरे कागज पर किताबो का हिसाब ग्राहको को दे रहे है। आप इसी से अंदाजा लगा सकते है किस प्रकार शिक्षा जगत ये माफिया ग्राहक और सरकार दोनो को लूट रहे है। अगर समय रहते आयकर और बिक्रीकर विभाग इन दुकानो पर छापेमारी करे तो लाखो रूपये नगदी और किताबे मिल सकती है जिसका कोई लेखाजोखा नही मिलेगा।
