निर्मल मन से ही होती है ईश्वर की प्राप्तिः बाबा प्रियदर्शी राम

   जौनपुर। अघोरेश्वर धाम बनौरा रायगढ़ (छत्तीसगढ़) आश्रम के पीठाधीश्वर व अघोर संत भगवान राम के प्रिय शिष्य संत प्रियदर्शी राम जी ने कहा कि निर्मल मन से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है।  संसार के भौतिक पदार्थों के प्रति आशक्ति व माया के विभिन्न रूप जीव हेतु भटकाव का कारण बने रहते हैं। ज्ञान, विवेक, साधना के मार्ग पर चलकर मनुष्य को स्वयं का ज्ञान होता है। स्वयं को जानना ही दुखों, संतापों से मुक्ति का मार्ग है। उक्त विचार वे बुधवार को सिकरारा क्षेत्र के खानापट्टी गांव में स्थित अवधूत कुटी पर आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम में प्रवचन करते हुये व्यक्त किये। मूर्धन्य संत बाबा प्रियदर्शी राम ने कहा कि संत महात्माओं का स्वभाव ही जन कल्याण करना है। मनुष्य शरीर बहुत दुर्लभ है। इस शरीर को पाकर आत्म कल्याण करना चाहिये। अघोर संत ने कहा कि प्रभू इतना दयालु है कि वह अपने प्रिय जीव के लिये आहार की व्यवस्था पहले से ही करके रखता है। गर्भस्थ शिशु इस संसार में आता है तो उसकी मां के स्तन से अमृत स्राव उसी की कृपा से होता है। इसके पहले कुटी पर पहुंचते ही वहां उपस्थित श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव का उद्घोष करके पुष्पवर्षा किया। इसके बाद आरती पूजन के साथ श्रद्धालुओं ने शाष्टांग प्रणाम किया जहां बाबा ने सभी को प्रसाद वितरित किया। इसी क्रम में कुटी की देखभाल में लगे बाबा दीपराज सिंह ने अभ्यागतों का स्वागत किया। इस अवसर पर दिनेश चैधरी, विनय सिंह, अवधेश सिंह, यदुनाथ सिंह, सत्यनाथ सिंह, हंसराज सिंह, दुष्यन्त सिंह, ग्राम प्रधान बैजनाथ यादव सहित भारी संख्या में महिला व पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे।

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