जौनपुर गौरव: जख्म मिटाने की तलास में जो मरहम मिला उससे अब मजलूमो का घाव भर रहे संजय जेब्रा
https://www.shirazehind.com/2016/05/blog-post_72.html?m=0
जौनपुर। कुदरत की मार पड़ी तो मुफलिसी ने इनका इम्तहान लिया, समाज के कुरितियों ने इन्हे जख्म दिया तो कांटो भरी राह चलना इनकी नियत बन गयी ,जख्म मिटाने की तलास में जो मरहम मिला उससे अब ये मजलूमो का घाव भर रहे है। खुद की पीड़ा महसूस कर अब दूसरो की दुनियां बसा रहे है। अब ये गरीबो के हमदर्द भी है तो रईसो के आंख के तारे भी। इनके मिशन में अब हर कोई कंधा से कंधा मिलाकर चलता है। जी हां हम बात कर रहे जौनपुर के युवा समाज सेवी संजय सेठ जेब्रा की। संजय के सिर से पिता साया मात्र 18 वर्ष की उम्र में उठ गया पिता की मौत के आठ माह बाद मां भी दुनियां से चल बसी। ऐसी स्थिति में इस युवा के कंधे पर एक भाई और 5 बहनो की शादी और उनके पालन पोषण का बोझ आ गया। इस जिम्मेदारियों को निभाने में संजय को जो जख्म समाज ने दिया वह दर्द किसी और को न मिले इस तरफ कार्य करना शुरू कर दिया है।
संजय सेठ नगर के टैगोर नगर उर्दू बाजार के निवासी है। इनका जन्म 7 मई 1971 को हुआ था। इनकी माता का नाम मालती देवी और पिता का नाम श्यामलाल सेठ था। सामान्य परिवार में जन्म लेने वाले संजय अपनी मेहनत की बदौलत प्राथमिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर बारीनाथ से किया हाई स्कूल नगर पालिका इण्टर कालेज से इण्टर की पढ़ाई शिया कालेज से की। बीए एमए और एलएलबी टीडीपीजी कालेज से किया। पढ़ाई के समय ही संजय के पिता की 16 नवम्बर 1992 को मौत हो गयी मात्र 18 वर्ष की आयु में इस युवा के ऊपर एक भाई और पांच बहनो की पालन पोषण पढ़ाई लिखाई और शादी विवाह का जिम्मा आ गया। इसी बीच मां भी दुनियां छोड़कर चली गयी। अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए संजय भारतीय जीवन बीमा का ऐजेंट बन गये जिससे बा मुश्किल घर का खर्च चल पाता था बाद में वे एक आभूषण की दुकान खोलकर अपना जीवन व्यतीत कर रहे है।
पांच बहनो की शादियों के लिए जब संजय समाज में निकले तो लोग इनकी झमता का आकलन कर इनका उपहास करने लगे इन्हे तिरस्कार भी मिला। पर इरादे फौलादी थे जैसे तैसे इन्होने यह जिम्मेदारी भी निभाई लेकिन इस दौर में इन्हे जो पीड़ा महसूस हुई उसका दिलो दिमाग पर बड़ा असर पड़ा। फिर इन्होने गरीब बेटियों की शादी के लिए वीणा उठाया। संजय ने 4 सितम्बर 1994 में जेब्रा नामक एक सामाजिक संस्था का गठन किया। 1997 में इसी संस्था ने सामूहिक विवाह का आयोजन किया जिसमें नौ जोड़ो की शादियां हुई इस कार्यक्रम में आये सारे खर्च जन सहयोग से हुआ। फिर तो यह सिलसिला ही चल पड़ा हर तीन वर्ष पर ये सामूहिक विवाह का आयोजन करते है जिसमें समाज के सम्भ्रांत जन डाक्टर व्यापारी और कुछ राजनेता अपना सहयोग करते है। अब तक साढ़े चार सौ जोड़ो की शादियां करा चुके है।
संजय जेब्रा की अन्य समाज सेवाएं
संजय जहां सामूहिक विवाह का आयोजन करके दहेज के खिलाफ जंग छेड़ रखा वही जाड़े में गरीबो असहायों को ऊनी कपड़े और कम्बल का वितरण करते है। इससे पूर्व कारगिल युध्द में शहीद परिवारो और गुजरात भूकंप पीडि़त परिवारो की आर्थिक सहायत के लिए चैरिटी शो का आयोजन किया जा चुका है गया। गरीब छात्र-छात्राओ को प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च स्तर की शिक्षा दिलाने का भी जिम्मा जेब्रा ने उठा रखी है। संस्था ने धर्मापुर ब्लाक के कबिरूद्दीपुर जूनियर हाई स्कूल को गोद ले रखा है। इस स्कूल के सभी छात्र-छात्राओ को हर स्तर की सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही है।
संजय सेठ नगर के टैगोर नगर उर्दू बाजार के निवासी है। इनका जन्म 7 मई 1971 को हुआ था। इनकी माता का नाम मालती देवी और पिता का नाम श्यामलाल सेठ था। सामान्य परिवार में जन्म लेने वाले संजय अपनी मेहनत की बदौलत प्राथमिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर बारीनाथ से किया हाई स्कूल नगर पालिका इण्टर कालेज से इण्टर की पढ़ाई शिया कालेज से की। बीए एमए और एलएलबी टीडीपीजी कालेज से किया। पढ़ाई के समय ही संजय के पिता की 16 नवम्बर 1992 को मौत हो गयी मात्र 18 वर्ष की आयु में इस युवा के ऊपर एक भाई और पांच बहनो की पालन पोषण पढ़ाई लिखाई और शादी विवाह का जिम्मा आ गया। इसी बीच मां भी दुनियां छोड़कर चली गयी। अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए संजय भारतीय जीवन बीमा का ऐजेंट बन गये जिससे बा मुश्किल घर का खर्च चल पाता था बाद में वे एक आभूषण की दुकान खोलकर अपना जीवन व्यतीत कर रहे है।
पांच बहनो की शादियों के लिए जब संजय समाज में निकले तो लोग इनकी झमता का आकलन कर इनका उपहास करने लगे इन्हे तिरस्कार भी मिला। पर इरादे फौलादी थे जैसे तैसे इन्होने यह जिम्मेदारी भी निभाई लेकिन इस दौर में इन्हे जो पीड़ा महसूस हुई उसका दिलो दिमाग पर बड़ा असर पड़ा। फिर इन्होने गरीब बेटियों की शादी के लिए वीणा उठाया। संजय ने 4 सितम्बर 1994 में जेब्रा नामक एक सामाजिक संस्था का गठन किया। 1997 में इसी संस्था ने सामूहिक विवाह का आयोजन किया जिसमें नौ जोड़ो की शादियां हुई इस कार्यक्रम में आये सारे खर्च जन सहयोग से हुआ। फिर तो यह सिलसिला ही चल पड़ा हर तीन वर्ष पर ये सामूहिक विवाह का आयोजन करते है जिसमें समाज के सम्भ्रांत जन डाक्टर व्यापारी और कुछ राजनेता अपना सहयोग करते है। अब तक साढ़े चार सौ जोड़ो की शादियां करा चुके है।
संजय जेब्रा की अन्य समाज सेवाएं
संजय जहां सामूहिक विवाह का आयोजन करके दहेज के खिलाफ जंग छेड़ रखा वही जाड़े में गरीबो असहायों को ऊनी कपड़े और कम्बल का वितरण करते है। इससे पूर्व कारगिल युध्द में शहीद परिवारो और गुजरात भूकंप पीडि़त परिवारो की आर्थिक सहायत के लिए चैरिटी शो का आयोजन किया जा चुका है गया। गरीब छात्र-छात्राओ को प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च स्तर की शिक्षा दिलाने का भी जिम्मा जेब्रा ने उठा रखी है। संस्था ने धर्मापुर ब्लाक के कबिरूद्दीपुर जूनियर हाई स्कूल को गोद ले रखा है। इस स्कूल के सभी छात्र-छात्राओ को हर स्तर की सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही है।



