हंसते हंसते फांसी के फंदे पर झूल गये थे भगत सिंह
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जौनपुर। शहीदे आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू की 87 वीं शहादत दिवस पर जिले के कई संगठनों और समाजसेवी लोगो ने श्रध्दजंलि अर्पित किया। इससे पूर्व नगर में एक विशाल जुलूस भी निकालकर भारत माता के जयकारे लगाया गया।
शहीदे आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू के शहादत दिवस के मौके पर आज दिन में ए आई डी एस ओ, ए आई डी वाई ओ और ए आई एम एस एस के संयुक्त तत्वाधान में नगर के पालिटेक्निक चौराहा से एक विशाल जुलूस निकाला गया। यह जुलूस ओलंदगंज, चहारसू चौराहा, कोतवाली होते हुए सब्जी मण्डी में स्थित शहीद भगत सिंह के पार्क पहुंचा। यहां पर पहले सभी लोगो भगत सिंह की मूर्ति पर माल्यापर्ण किया। उसके बाद एक सभा हुई। वक्ताओ ने कहा कि 3 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह के बाल मन पर बड़ा गहरा प्रभाव डाला। उनका मन इस अमानवीय कृत्य को देख देश को स्वतंत्र करवाने की सोचने लगे थे । भगत सिंह ने चंद्रशेखर आज़ाद के साथ मिलकर क्रांतिकारी संगठन तैयार किया। लाहौर षड़यंत्र मामले में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू को फाँसी की सज़ा सुनाई गई व बटुकेश्वर दत्त को आजीवन कारावास दिया गया। भगत सिंह को 23 मार्च, 1931 की शाम सात बजे सुखदेव और राजगुरू के साथ फाँसी पर लटका दिया गया। तीनों ने हँसते-हँसते देश के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया भगत सिंह एक अच्छे वक्ता, पाठक व लेखक भी थे। उन्होंने कई पत्र-पत्रिकाओं के लिए लिखा व संपादन भी किया।
शहीदे आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू के शहादत दिवस के मौके पर आज दिन में ए आई डी एस ओ, ए आई डी वाई ओ और ए आई एम एस एस के संयुक्त तत्वाधान में नगर के पालिटेक्निक चौराहा से एक विशाल जुलूस निकाला गया। यह जुलूस ओलंदगंज, चहारसू चौराहा, कोतवाली होते हुए सब्जी मण्डी में स्थित शहीद भगत सिंह के पार्क पहुंचा। यहां पर पहले सभी लोगो भगत सिंह की मूर्ति पर माल्यापर्ण किया। उसके बाद एक सभा हुई। वक्ताओ ने कहा कि 3 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह के बाल मन पर बड़ा गहरा प्रभाव डाला। उनका मन इस अमानवीय कृत्य को देख देश को स्वतंत्र करवाने की सोचने लगे थे । भगत सिंह ने चंद्रशेखर आज़ाद के साथ मिलकर क्रांतिकारी संगठन तैयार किया। लाहौर षड़यंत्र मामले में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू को फाँसी की सज़ा सुनाई गई व बटुकेश्वर दत्त को आजीवन कारावास दिया गया। भगत सिंह को 23 मार्च, 1931 की शाम सात बजे सुखदेव और राजगुरू के साथ फाँसी पर लटका दिया गया। तीनों ने हँसते-हँसते देश के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया भगत सिंह एक अच्छे वक्ता, पाठक व लेखक भी थे। उन्होंने कई पत्र-पत्रिकाओं के लिए लिखा व संपादन भी किया।

