पिता एक वटवृक्ष है जिनकी छांव में पूरा परिवार सुख से रहता है

गौराबादशाहपुर (जौनपुर)  पिता की तुलना उस वटवृक्ष से करनी चाहिये जिसकी छांव मे पूरा परिवार सुख से रहता है। हम जीवन भर भोजन बनाने वाली मां केा तो सहज ही याद रखते है परन्तु जीवन भर भोजन की व्यवस्था करने वाले पिता को सहज ही भूल जाते है। चोट लगने पर अरे मां यही मुंह से निकलता है परन्तु अगर कोई ट्रक पास आकर ब्रेक लगाये तो अरे बाप रे स्वभावतः ये शब्द मुंह से निकलता है। क्योकि छोटे छोटे संकटो के लिये तो मां होती है परन्तु बड़े संकट आने पर पिता ही याद आते है। उक्त बाते गौराबादशाहपुर यूथ क्लब व गौराबादशाहपुर के फेसबुक पेज फालोअर्स द्वारा हर वर्ष जून माह के तीसरे रविवार को पड़ने वाले फादर्स डे पर आयोजित एक कार्यक्रम मे बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुये गौराबादशाहपुर के उद्‍यमी और प्रधानपति नवीन साहू ने कहीं। आगे उन्होने ध्रुव की घटना के बारे में बतलाते हुये कहा कि किस तरह से ध्रुव को पिता की गोद में बैठने का स्थान न मिलने के कारण उसने सबसे ऊँचा स्थान हासिल किया। कार्यक्रम में आये लोगो को प्रधानाचार्य  कमलेश जी, व्यापार मण्डल अध्यक्ष लल्लन सिंह, रीमा त्रिपाठी, आदि ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर ऋचा, सुरेन्द्र सिंह, नवीन दूबे, संतोष वर्मा, विशाल साहू, शिशु तिवारी आदि मौजूद रहे।

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