निकली गई मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता रैली
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जौनपुर। मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह 8
से 14 अक्टूबर 2018 के अंतर्गत ’’जागरूकता रैली’’ को कलेक्ट्रेट परिसर से
नगर मजिस्ट्रेट सुरेंद्र नाथ मिश्रा एवं अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी आर एस
कुशवाहा द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, जागरुकता रैली अंबेडकर
चौराहा, पानी टंकी होते हुए टी.वी. हॉस्पिटल पर सम्पन्न हुई। रैली में
इण्डियन पैरामेडि़कल कालेज, कुवर हरिबंश सिंह पैरामडिकल कालेज एवं अवध
पैरामेडिकल कालेज के छात्र/छात्राओं, नगर क्षेत्र की आगनबाड़ी
कार्यकत्रियों द्वारा भारी संख्या में हिसा लिया।
डा.
आर.एस. कुशवाहा ने बताया कि मनोरोग अभिशाप नहीं। मानसिक स्वास्थ्य एवं
शारीरिक स्वास्थ्य एक दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य
संबंधित कुछ तत्व जैसे चिंता/उलझन आज के भौतिक युग की सबसे गंभीर समस्या
है जो आम आदमी की दैनिक दिनचर्या एवं राष्ट्रीय उत्पादकता में बाधक है।
निम्न लक्षणों के माध्यम से इस रोग शुरुआत में ही पहचाना जा सकता है एवं
इसका निदान व्यवहारिक तरीकों एवं दवाओं से संभव है। जैसे - अनजान भय,
बार-बार बुरा होने का विचार, झुंझुनाहट एवं अत्यधिक चिंताएं, तनाव महसूस
होना, जल्दी थकान, हाथों में कंपन होना, हड़बड़ी में रहना एवं तनावमुक्त न
हो पाना, अंधेरे में भय लगना, अजनबियों से भय लगना, अकेले अथवा भीड़ में
रहने पर भी लगना, नींद आने में परेशानी एवं रात में बार-बार नींद खुल जाना,
अत्यधिक सपने आना, कभी-कभी डरावने सपने आना, एकाग्रता में कमी, याददाश्त
में कमी, शारीरिक लक्षण जैसे कि दर्द एवं मांसपेशियों में कसाव, दिल में
घबराहट, सीने में दर्द या कभी-कभी बेहोशी होना, अत्यधिक चिंता की वजह से
श्वांस लेने में तकलीफ होना।
उन्होंने कहा कि निम्न लक्षणों के आधार पर हम अवसाद नामक रोग की पहचान कर
सकते हैं जैसे उदास मन, पश्चाताप की भावना, नींद कम आना या अत्यधिक आना,
किसी काम में मन न लगना, उलझन एवं घबराहट होना, वजन कम या ज्यादा होना,
निराश का भाव, ऐसे प्रतीत होने की जिंदगी बेकार, व्यर्थ एवं महत्वहीन है,
आत्महत्या के विचार आना, सुबह बिस्तर छोड़ने की इच्छा न करना, नींद
निर्धारित समय से दो घंटे पहले खुल जाना, यौन इच्छा में कमी, रोने की इच्छा
होना, शारीरिक लक्षण जैसे कि कमर दर्द (लंबे समय तक), सिर में दर्द
इत्यादि होते हैं।
आबसेसिव-कम्पलसिव
डिसआर्डर (ओसीडी) में एक ही विचार बार-बार मन में आना, यह जानते हुए कि
विचार गलत है, उसको रोकने का प्रयत्न करना, थोड़े समय तक ही विचार रोक
पाना, विचार रोकने पर अत्यधिक उलझन होना, कभी-कभी विचार के अनुरूप कार्य
करने को बाधित होना, यदि कार्य न करें तो अत्यधिक उलझन होना, कार्य
बार-बार करने से उलझन का थोड़ी देर के लिए शांत होना परंतु पुनः विचार आने
पर उस कार्य को करने बाध्य होना मुख्य लक्षण है। इसका इलाज पूर्णतया संभव
है।
डा. एस के
यादव ने बताया कि नशा करने वाले व्यक्ति में अक्सर रात में देर से घर आना
कारण पूछने पर झूठा बहाना बनाना, अक्सर देर देर तक बिना किसी कारण घर से
बाहर रहना, अनियमित दिनचर्या जैसे सोने, खाने एवं नहाने इत्यादि, व्यापार
के नुकसान के कारण को छुपाना, स्कूल या अन्य कार्य की क्षमता में कमी आना,
बिना उचित कारण अक्सर ऑफिस या कार्य में अनुपस्थित होना, बार-बार नौकरी
बदलना या नौकरी से निकालें जाना, कभी कभी जेब में बहुत सा धन पाया जाना, घर
की वस्तुएं चुराने व बेचने की आदत होना, व्यक्ति के वाहन अक्सर
दुर्घटनाग्रस्त होना, जेब खर्च की ज्यादा मांग करना, अक्सर जिद पूरी न होने
पर घर से भागने या मारने की धमकी देना आदि लक्षण पाये जाते है। रैली के
उपरान्त अर्बन स्लम मुफ्ती मोहल्ला मुफ्ती हाउस पर जागरुकता/चिकित्सा शिविर
का आयोजन किया गया जिसमें रोगियों को परामर्श दिया गया और चिन्हित करके
इलाज के लिए भेजा गया।
इस
अवसर पर डा. सत्यव्रत त्रिपाठी, डा. आईएन तिवारी, देवेन्द्र प्रसाद यादव,
अयज सिंह, सलिल यादव, समाजसेविका विमला सिंह, डा. पंकज, राजशेखर तिवारी
सहित सम्बन्धित अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

