सर्जिकल मास्क में मेल्टब्लान का इस्तेमाल न होने से संक्रमण का गम्भीर खतरा
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रिपोर्ट - हिमांशु श्रीवास्तव
जौनपुर। थ्री लेयर सर्जिकल मास्क का इन दिनों धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है।भारत की बहुत सी मुनाफा खोर कम्पनियां सर्जिकल मास्क में घटिया कपड़े का इस्तेमाल कर रही हैं जिसकी वजह से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। सर्जिकल मास्क में मुख्यतः नॉन वोवन कपड़े का इस्तेमाल किया जाता है और मेल्टब्लान कपड़े का स्तर बीच में लगाया जाता है। कोरोना संक्रमण की आड़ में धंधेबाजों ने इसे भी कमाई का जरिया बना लिया। भारत में कई जगह सर्जिकल मास्क बनाने की फैक्ट्रियां धड़ल्ले से खोल दी गई।अप्रशिक्षित कारीगर कपड़े सिलने वाली मशीन से सर्जिकल मास्क सिलने लगे। अब यह मास्क स्वास्थ्य कर्मियों के अलावा आम लोगों के लिए भी मुसीबत का सबब बन रहे हैं।नकली मास्क अब लोगों को बीमार कर रहे हैं।इसे पहनने से घुटन महसूस होती है एवं सांस की तकलीफ होती है।कुछ स्वास्थ्य कर्मियों की शिकायत पर अधिकतर अस्पतालों ने ऐसे मास्क मंगाने बंद कर दिए जिससे धंधेबाज अब अपने बनाए मास्क को आम जनता में बेचने की कोशिश कर रहे हैं।जानकारी के अभाव में लोग भी घटिया क्वालिटी का मास्क खरीद रहे हैं।धंधे वालों ने न केवल शहर बल्कि देहात के क्षेत्रों में भी मास्क बनाने की कंपनी खड़ी कर दी।फार्मूले का पता न होने के कारण घटिया क्वालिटी के कपड़ों से मास्क तैयार किए गए।सर्जिकल मास्क बनाने में नॉन वोवन फैब्रिक कपड़ा,मेल्टब्लान फिल्टर, नोज वायर इलास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी वजह से इन्फेक्शन का खतरा कम रहता है।यह सामान हिमाचल प्रदेश,बेंगलुरु व महाराष्ट्र से आते हैं।सर्जिकल मास्क में प्रयुक्त मेल्टब्लान कपड़े के दाम में भारी उछाल आया। फरवरी में जो ₹300 प्रति किलो मिल रहा था अब वह 5700 रुपए प्रति किलो हो गया है। कमाई अधिक करने के चक्कर में मास्क बनाने वालों ने मेल्टब्लान कपड़े का इस्तेमाल या तो कम कर दिया या तो नहीं कर रहे हैं।चूंकि ऐसा मास्क कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने में प्रभावी नहीं है इसलिए लोगों की जान पहले से ज्यादा खतरे में है।प्रशासन ने थ्री लेयर सर्जिकल मास्क की कीमत ₹10 और 2 लेयर मास्क की कीमत ₹8 तय की थी।मानकों की अनदेखी करके मास्क तैयार किए जा रहे हैं।बहुत से सर्जिकल मास्क में स्पनबांड कपड़े का इस्तेमाल हो रहा है जो घटिया गुणवत्ता का है।इस कपड़े से प्रति मास्क बनाने की कीमत एक रुपए आ रही है।वही मास्क फुटपाथ से लेकर दुकानों में कहीं 5 से ₹10 तो कहीं 10 से ₹20 में बिक रहा है और थोक में 100 पीस ₹200 में बिक रहा है।वैसे भी सर्जिकल मास्क सामान्य संक्रमण व धूल मिट्टी से ही लोगों को सुरक्षित रख सकता है।कोरोना कॉल में भी कुछ मुनाफाखोर लोगों की जेब काटने के साथ-साथ उनकी जिंदगी से खेलने से बाज नहीं आ रहे।मास्क का धंधा उनके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रहा है।कारण यह है कि ये मास्क कम कीमत में सबसे सस्ते हैं इसलिए इनकी मांग ज्यादा है।लोगों में वितरित करने के लिए भी ज्यादातर यही मास्क इस्तेमाल हो रहा है।यह सांस व हृदय रोगियों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।सर्जिकल मास्क में खराब कपड़े का इस्तेमाल होने से हमारे द्वारा छोड़ी गई सांस बाहर नहीं निकल पाती। अवशेष दोबारा सांस के साथ फेफड़े में जाते हैं जो नुकसान पहुंचाते हैं।स्वास्थ्य कर्मियों के अनुसार कोरोनावायरस से बचाव के लिए 5 से 6 लेयर वाला केएन 95,एन95 मास्क ही सर्वश्रेष्ठ है।सर्जिकल मास्क कोरोनावायरस से बचाव में कारगर नहीं है।यह सामान्य संक्रमण व धूल मिट्टी से ही लोगों को सुरक्षित रख सकता है।एन 95 मास्क आयात हो रहा है वही के एन 95 का उत्पादन होने लगा है।चूंकि कोरोनावायरस से बचाव के लिए बताए जा रहे आवश्यक उपायों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपाय मास्क पहनना है इसलिए बेहतर क्वालिटी का मास्क ही बचाव का सर्वोत्तम उपाय है।लो रिस्क एरिया,सड़क,दुकान, दफ्तर इत्यादि में कपड़े का बना दो या तीन लेयर मास्क इस्तेमाल किया जा सकता है।
जौनपुर। थ्री लेयर सर्जिकल मास्क का इन दिनों धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है।भारत की बहुत सी मुनाफा खोर कम्पनियां सर्जिकल मास्क में घटिया कपड़े का इस्तेमाल कर रही हैं जिसकी वजह से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। सर्जिकल मास्क में मुख्यतः नॉन वोवन कपड़े का इस्तेमाल किया जाता है और मेल्टब्लान कपड़े का स्तर बीच में लगाया जाता है। कोरोना संक्रमण की आड़ में धंधेबाजों ने इसे भी कमाई का जरिया बना लिया। भारत में कई जगह सर्जिकल मास्क बनाने की फैक्ट्रियां धड़ल्ले से खोल दी गई।अप्रशिक्षित कारीगर कपड़े सिलने वाली मशीन से सर्जिकल मास्क सिलने लगे। अब यह मास्क स्वास्थ्य कर्मियों के अलावा आम लोगों के लिए भी मुसीबत का सबब बन रहे हैं।नकली मास्क अब लोगों को बीमार कर रहे हैं।इसे पहनने से घुटन महसूस होती है एवं सांस की तकलीफ होती है।कुछ स्वास्थ्य कर्मियों की शिकायत पर अधिकतर अस्पतालों ने ऐसे मास्क मंगाने बंद कर दिए जिससे धंधेबाज अब अपने बनाए मास्क को आम जनता में बेचने की कोशिश कर रहे हैं।जानकारी के अभाव में लोग भी घटिया क्वालिटी का मास्क खरीद रहे हैं।धंधे वालों ने न केवल शहर बल्कि देहात के क्षेत्रों में भी मास्क बनाने की कंपनी खड़ी कर दी।फार्मूले का पता न होने के कारण घटिया क्वालिटी के कपड़ों से मास्क तैयार किए गए।सर्जिकल मास्क बनाने में नॉन वोवन फैब्रिक कपड़ा,मेल्टब्लान फिल्टर, नोज वायर इलास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी वजह से इन्फेक्शन का खतरा कम रहता है।यह सामान हिमाचल प्रदेश,बेंगलुरु व महाराष्ट्र से आते हैं।सर्जिकल मास्क में प्रयुक्त मेल्टब्लान कपड़े के दाम में भारी उछाल आया। फरवरी में जो ₹300 प्रति किलो मिल रहा था अब वह 5700 रुपए प्रति किलो हो गया है। कमाई अधिक करने के चक्कर में मास्क बनाने वालों ने मेल्टब्लान कपड़े का इस्तेमाल या तो कम कर दिया या तो नहीं कर रहे हैं।चूंकि ऐसा मास्क कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने में प्रभावी नहीं है इसलिए लोगों की जान पहले से ज्यादा खतरे में है।प्रशासन ने थ्री लेयर सर्जिकल मास्क की कीमत ₹10 और 2 लेयर मास्क की कीमत ₹8 तय की थी।मानकों की अनदेखी करके मास्क तैयार किए जा रहे हैं।बहुत से सर्जिकल मास्क में स्पनबांड कपड़े का इस्तेमाल हो रहा है जो घटिया गुणवत्ता का है।इस कपड़े से प्रति मास्क बनाने की कीमत एक रुपए आ रही है।वही मास्क फुटपाथ से लेकर दुकानों में कहीं 5 से ₹10 तो कहीं 10 से ₹20 में बिक रहा है और थोक में 100 पीस ₹200 में बिक रहा है।वैसे भी सर्जिकल मास्क सामान्य संक्रमण व धूल मिट्टी से ही लोगों को सुरक्षित रख सकता है।कोरोना कॉल में भी कुछ मुनाफाखोर लोगों की जेब काटने के साथ-साथ उनकी जिंदगी से खेलने से बाज नहीं आ रहे।मास्क का धंधा उनके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रहा है।कारण यह है कि ये मास्क कम कीमत में सबसे सस्ते हैं इसलिए इनकी मांग ज्यादा है।लोगों में वितरित करने के लिए भी ज्यादातर यही मास्क इस्तेमाल हो रहा है।यह सांस व हृदय रोगियों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।सर्जिकल मास्क में खराब कपड़े का इस्तेमाल होने से हमारे द्वारा छोड़ी गई सांस बाहर नहीं निकल पाती। अवशेष दोबारा सांस के साथ फेफड़े में जाते हैं जो नुकसान पहुंचाते हैं।स्वास्थ्य कर्मियों के अनुसार कोरोनावायरस से बचाव के लिए 5 से 6 लेयर वाला केएन 95,एन95 मास्क ही सर्वश्रेष्ठ है।सर्जिकल मास्क कोरोनावायरस से बचाव में कारगर नहीं है।यह सामान्य संक्रमण व धूल मिट्टी से ही लोगों को सुरक्षित रख सकता है।एन 95 मास्क आयात हो रहा है वही के एन 95 का उत्पादन होने लगा है।चूंकि कोरोनावायरस से बचाव के लिए बताए जा रहे आवश्यक उपायों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपाय मास्क पहनना है इसलिए बेहतर क्वालिटी का मास्क ही बचाव का सर्वोत्तम उपाय है।लो रिस्क एरिया,सड़क,दुकान, दफ्तर इत्यादि में कपड़े का बना दो या तीन लेयर मास्क इस्तेमाल किया जा सकता है।

