श्रमजीवी कांड की विवेचना का हीरो कौन ! कैसे पहुंचे असली गुनहगारों तक!

 

जौनपुर: श्रमजीवी विस्पोट कांड के तीसरे विवेचक शेषनाथ यादव प्रभारी निरीक्षक जीआरपी वाराणसी को 29 अक्टूबर 2005 को विवेचना मिली। सितंबर 2005 में बिहार में हुए बम विस्फोट के बाद उन्होंने बिहार शरीफ जाकर पता लगाया तो पता चला कि वहां प्रतिबंधित सुन्नी संगठन, लश्करे तैय्यबा, हूजी व अलकायदा से संबंधित आतंकवादी समय-समय पर आते हैं। उनका आतंक है और वे आतंकवादी घटना करते हैं तथा विस्फोटक आदि बनाते हैं। 5 फरवरी 2006 को खुसरूपुर के मियां टोला के विस्फोटक से संबंधित विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट उन्हें मिली जिसमें नाइट्रेट, पोटेशियम तथा एल्यूमिनियम पाए गए थे जो श्रमजीवी विस्फोट कांड के पदार्थ से मेल खाते थे। विवेचक को यही आधार मिला कि दोनों विस्फोटों का आपस में कोई संबंध होगा। इसके बाद 2006 में ही जब सूचना पर कलकत्ता डिटेक्टिव एजेंसी जाकर गिरफ्तार अब्दुल्ला निवासी वाराणसी से पूछताछ किए तो आतंकी ओबैदुर्रहमान का नाम विस्फोट कांड में आया। मुर्शिदाबाद में जेल में बंद ओबैदुर्रहमान से विवेचक ने पूछताछ किया तो उसने आलमगीर उर्फ रोनी,हिलाल, नफीकुल व अन्य आरोपियों के नाम का खुलासा किया। इसके अलावा विस्फोट कांड में घायल  दो गवाह राजेश कुमार निवासी नेवादा, बिहार व रणजीत के बताने के आधार पर विस्फोट से पूर्व ट्रेन में चेनपुलिंग करने वाले आरोपितों स्केच बनाया। इन्होंने बताया कि विस्फोट के पूर्व विस्फोट वाले डिब्बे में दो आदमी घबराए हुए आगे पीछे आ जा रहे थे। उनका हुलिया व कद काठी बताया था। रोनी जब 16 अक्टूबर 2006 को दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार हुआ तया अनीसुत व मुहीबुल बाग्लादेशी जुड़वा भाई 28 फरवरी 2006 को गिरफ्तार हुए थे। दोनों ने रोनी व अन्य आरोपियों के विस्फोट कांड में शामिल होने का बयान दिया था।

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