भागवत कथा वह अमृत है, जो मृत्यु के भय को मिटाकर मोक्ष का मार्ग दिखाती है: पंडित निलेश महराज

 तालामझवारा पड़ान चल रहे सात दिवसीय श्री मद भागवत कथा के दूसरे दिन उमड़ा जनसैलाब

जलालपुर।​ भागवत कथा मनुष्य को मोह-माया से मुक्ति की प्रेरणा देता है। राजा परीक्षित ने मृत्यु का भय होने के बावजूद अपना सर्वस्व त्याग कर मोक्ष का मार्ग चुना।उक्त बाते मंगलवार को क्षेत्र के तालामझवारा पड़ान में पंडित शारदा प्रसाद पाण्डेय के आवास पर चल सात दिवसीय श्री मद भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ महापुराण के दूसरे दिन काशी से पधारे कथावाचक पंडित निलेश महाराज वेंकटेश ने कथा का शुभारंभ करते हुए कहा कि भागवत कथा वह कल्पवृक्ष है, जिसके आश्रय में आने वाले हर जीव का कल्याण निश्चित है जैसे भक्ति महारानी के कष्टों को दूर करने के लिए सनकादि ऋषियों ने भागवत कथा का आयोजन किया था धुंधुकारी जैसे पापी का उद्धार भी भागवत कथा से संभव हुआ।गलत संगति जीवन को नरक बना देती है।​​आज के समय में संतान को धन से ज्यादा संस्कार देने की आवश्यकता है।जहाँ भक्ति होती है, वहाँ ज्ञान और वैराग्य स्वतः ही युवा हो जाते हैं।कथा श्रवण मात्र से व्यक्ति के

जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं।कथा का मुख्य उद्देश्य सांसारिक विषयों को भोगने के बजाय परमात्मा से जुड़ना और मन को निर्मल बनाना बताया गया।कथा आरम्भ के पूर्व आयोजक शारदा पाण्डेय पत्नी होशिला पाण्डेय के द्वारा व्यास पूजन किया गया पवन अतुल पाण्डेय के द्वारा सभी श्रद्धालुओं का अंगवत्रम गीता पुस्तक भेंटकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पंडित रवींद्र नाथ मिश्रा,शशिधर मिश्र. विवेकानंद मिश्र,देवी प्रसाद उपाध्याय,कृष्ण चंद्र पांडेय, राजेश मिश्रा, कृष्ण चंद चौबे, त्रिलोचन चौबे,समेत भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे

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