आधे गांव में नहीं ही सकी चकबन्दी, चारपाई पर मरीज ले जाने को मजबूर
https://www.shirazehind.com/2026/05/blog-post_5.html?m=0
खानापट्टी में चकबन्दी न होने से ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित
सिकरारा, जौनपुर। मंगल ग्रह तक पहुंचने की उपलब्धि हासिल करने वाले देश में उत्तर प्रदेश के जनपद का खानापट्टी गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। पिछले 60 वर्षों से ग्रामीण चकबंदी की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन सड़क, खड़ंजा, नाली जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव उन्हें हर दिन परेशान कर रहा है। विशेष रूप से गांव की मल्लाह और यादव बस्ती में रहने वाले लोग सबसे अधिक प्रभावित हैं जहां मरीजों को चारपाई पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ता है।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि चकबंदी न होने के कारण जमीनों का बंटवारा और व्यवस्थापन अधर में लटका है जिसके चलते सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्य रुके हुए हैं। गांव में पक्की सड़कों और नालियों की कमी के कारण बारिश में कीचड़ और जलभराव की समस्या आम है जिससे आवागमन और भी मुश्किल हो जाता है। आकस्मिक बीमारी के मामलों में एम्बुलेंस न पहुँच पाने के कारण मरीजों को चारपाई पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। उक्त गांव के पूर्व प्रधान बैजनाथ यादव ने बताया, "हमारे गांव में न सड़क है, न नाली। बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाने के लिए चारपाई ही एकमात्र साधन है। चकबंदी के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिलते हैं लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।"
उक्त गांव के प्रेम निषाद व ओमनाथ निषाद ने बताया कि चकबंदी न होने से बस्ती तक सड़क व जल निकास की नालियों का निर्माण नही हो पाया, बारिश के दिनों में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। गाय घाट निषाद बस्ती की महिलाओं ने बताया कि बस्ती में सड़क न बनने से बच्चों के शादी में दिक्कत हो रही है। बस्ती का एक युवक पीएसी में जवान है। उसकी शादी तय हुई जब लड़की को पता चला कि उक्त गांव तक जाने को सड़क नहीं है तो उसने साफ इंकार कर दिया।"
जौनपुर के समाजवादी पार्टी के सांसद बाबूराम कुशवाहा से ग्रामीणों ने समस्या बताया तो उन्होंने चकबंदी विभाग से प्रक्रिया शुरू कराने का आश्वासन दिए थे। उनकी पहल पर चकबंदी विभाग ने गांव में खुली बैठक का आयोजन करवाया था। बैठक में ग्रामीणों से चकबंदी के पक्ष और विपक्ष में हस्ताक्षर करवाए गए थे जिसमें एक भी लोगों ने विपक्ष में हस्ताक्षर नहीं किये जिससे लोगों में उम्मीद जगी थी। समय बीतने के साथ मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय उदासीनता के कारण चकबंदी की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है। गांव के पूर्व प्रधान डॉ रामचरित्र निषाद, अवधेश निषाद, शैलेश यादव, राहुल यादव, सुशील सिंह, जितेंद्र सिंह, संतोष सिंह, वीरेंद्र यादव, रामहित यादव, अनिल यादव, राम अकबाल यादव, गुरु प्रसाद यादव सहित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग किया कि चकबंदी की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा किया जाए और गांव में सड़क, नाली, जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उनका कहना है कि जब देश अंतरिक्ष में मंगल तक पहुंच सकता है तो क्या उनके गांव तक सड़क नहीं पहुंच सकती?

