कोविड की बंदी में चकबंदी न्यायालय खोलने से भड़के वकील

 जौनपुर। कोविड की बढ़ती रफ़्तार को लेकर कलेक्ट्रेट अधिवक्ता संघ द्वारा न्यायिक कार्य से विरत रहने के प्रस्ताव को दरकिनार कर चकबन्दी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी द्वारा कार्य सम्पादित करने से सोमवार को अधिवक्ताओं में उबाल आ गया। मामले से नाराज वकीलों ने बैठक कर निन्दा प्रस्ताव पारित कर निर्णय लिया कि बंदोबस्त अधिकारी का स्थानांतरण होने तक चकबंदी न्यायालय का कार्य बहिष्कार किया जाएगा। इतना ही नहीं 30 अप्रैल तक कोविड को देखते हुए स्ट्राइक पर रहने का निर्णय लिया है।

 इस संबंध में कलेक्ट्रेट अधिवक्ता संघ के सभागार में सोमवार पूर्वाहन 11 बजे अधिवक्ताओं का जमावड़ा हुआ। यहाँ बार अध्यक्ष हरिश्चंद्र यादव ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि कोविड प्रोटाकल का खुले आम धज्जियाँ उड़ाई गयी हैं। चकबन्दी न्यायलय ने संघ के प्रस्ताव को उलंघन किया है। कलेक्ट्रेट अधिवक्ता संघ के महामंत्री आनंद कुमार मिश्र ने कहा कि बंदोबस्त अधिकारी का स्थानांतरण होने तक चकबन्दी न्यायालय का बहिष्कार जारी रहेगा। दौरान यह भी प्रस्ताव पारित किया गया है कि चकबन्दी के न्यायिक कार्यों का सहयोग करने वाले अधिवक्ताओं को चिन्हित किया जा रहा है। जो चोरी छुपे चकबंदी के लोगों की मदद करते हैं। ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। बैठक में उपस्थित अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि कोरोना महामारी को देखते हुए 30 अप्रैल तक कार्य से विरत रहा जाएगा। इस प्रकरण को प्रदेश के मुख्यमंत्री, प्रदेश के चकबन्दी आयुक्त,अपर मुख्य सचिव राजस्व और जिलाधिकारी को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है। कलेक्ट्रेट अधिवक्ता समिति की इस महत्वपूर्ण बैठक में राजीव सिन्हा,सुधाकर प्रजापति, महावीर लाल,अमरेश कुमार, राम सिंह,समर बहादुर यादव सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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