भगवान राम का जन्म होते ही लगा जय श्रीराम का नारा

 जौनपुर। श्री रामलीला समिति हुसेनाबाद द्वारा शुक्रवार को नारदमोह, रामजन्म , तड़का बध, फुलवारी और धनुष यज्ञ का मंचन किया गया । मंचन में भगवान राम का जन्म होते ही पूरा इलाका जय श्रीराम के उदघोष से गूंज उठा और धनुष टूटते ही पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट काफी देर तक सुनाई दी। 



नगर के हुसेनाबाद मोहल्ले में 79 वर्षो से भगवान राम के लीला का मंचन होता चला आ रहा है , पिछले दो वर्ष कोरोनाकाल में स्थगित रहा , दो वर्षों बाद पुनः शुरू हुई रामलीला के कलाकारों और दर्शकों में भारी उत्साह दिखाई पड़ रहा है । कलाकार पूरी निष्ठा से अपने अपने किरदार निभा रहे तो वही दर्शको से पंडाल खचाखच भरा रहा , सबसे अधिक उत्साह बच्चो में दिखाई पड़ रहा है।
 कलाकारों ने दिखाया कि मिथिला के राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के विवाह के लिए स्वयंवर का आयोजन करते हैं। जिसमें यह शर्त रखते हैं कि जो पुराने शिव धनुष को तोड़ेगा, उसी के साथ सीता का विवाह संपन्न होगा। जनक के आमंत्रण पर स्वयंवर में अनेक देशों के राजाओं के साथ गुरू विश्वामित्र भी शामिल होने आते हैं, जिनके साथ राम और लक्ष्मण भी आते हैं। घोषणा होते ही एक एक करके सभी राजा धनुष को तोड़ने के लिए जोर लगाते हैं, मगर उसे उठाने की कौन कहे कोई हिला तक नहीं सका। राजा जनक की मुश्किल स्थिति देखते हुए विश्वामित्र ने राम को इशारे से धनुष तोड़ने की आज्ञा दी। जिसे राम द्वारा उठाते ही वह टूट गया। धनुष टूटते ही पूरे पांडाल में जयश्री राम के गगनभेदी नारे लगने लगे।

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