तीन का दम




नालेज, स्किल और एटीट्यूड यानी इन मंत्रों पर अपनी पकड़ बना कर किसी भी क्षेत्र में कामयाबी का शिखर छुआ जा सकता है। महत्वपूर्ण बात यह है। कि इन दिनों देश में कई संस्थान, शैक्षिक संस्थानों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। और वे बताते है कि अपनी नालेज कैसी बढ़ाई जा सकती है। कंटेंट में किस तरह से बदलाव किया जा सकता है। जो अच्छी आमदनी का जरिया बन सके। इसके तहत साथ ही छात्रों को कोर्स के साथ-2 स्किल और एटीट्यूड डेवलप करने के तौर तरिके और टूल्स बताए जाते है। साथ ही केस स्टडी के पर आधारित प्रैक्टिकल कोर्स भी कराएं जाते है। और नियमित रुप से इंडस्ट्री के एक्सपर्ट के साथ भी राय मशविरा किया जाता हैं उसके अनुरुप ट्रेनर्स टीचर को भी अपडेट किया जाता है। ऐसे प्रशिक्षित छात्रों को इंडस्ट्री हाथों हाथ लिया ले जाती 
*एटीट्यूड हो पाॅजिटिव*

 एटीट्यूड का मतलब है। किसी व्यक्ति के रवैये या प्रवृत्ति से है। आप अन्य व्यक्तियों , परिस्थियों या महौल का सामना किस तरह करते है। या आपकी प्रवृत्ति पर निर्भर करता हैं एटीट्यूड एक तरह से मुख्य ड्राइवर की भूमिका में होता हैं जो सबसे पहले दिखता हैं। यानी आपके व्यवहार से आपके एटीट्यूड पता चलता है। आज के समय में कामयाबी के लिए मोटिवेशन टीमवर्क और कान्फिडेन्स जैसे एटीट्यूड की जरुरत होती है। इसके आलावा आपको हमेशा जागरुक रहने की जरुरत होती है। आज के बदले हुएं समय में आंख , कान खुले रहने चाहिए। आज के बदले हुए समय में विश्वसनीय व जिम्म्ेदार लोगों को पसन्द करतें है। जो समस्याओं को हल करने के साथ-साथ सामाजिक दक्षता भी रखते हों। और अपने साथ मिल जुलकार काम करने में यकीन रखतें है। एंेसें योग्यता रखने वाले हर एम्पलाई की हर जगह मांग होती हैं और वे मूल्यवान ह्रूामन रिसोर्स माने जाते है।

 



       *स्किल*

 

वह स्किल ही हैं जो किसी व्यक्ति के सैद्धांतिक ज्ञान को व्यवहारिकता में बदलता हैं । स्किल्ड यानी दक्ष होने पर ही व्यक्ति किसी काम को पूरी कुशलता के साथ पुरा करने में सक्षम हो पाता है। कहा जाता है कि अपने नालेज को प्रैक्टिकल में तब्दील करना ही स्किल है। स्किल की जरुरत प्रजेंटेशन ,सेल्स , मैनेजमेन्ट , कम्यूनिकेशन, बीपीओ , बैंकिग, एजुकेशन , इंश्योरंेश , रीटेल , केपीओ आदि में सबसे अधिक होती हैं । आज के समय में कारोबारी मुखिया हो या मानव संसाधन प्रबंधक ऐसे लोगो को जाॅब पर रखना चाहते है।

 



      *नालेज है बेशकीमती*

 

नालेज से अभिप्राय है किसी विषय के सैद्धांतिक या तकनीकी समझ से है। और जिस भी फील्ड में कैरियर बनाना चाहते है उस फील्ड में गहरा ज्ञान और व्यवहारिक  होनी आश्यक है। ज्ञान होना ही काफी नहीं हैं । ज्ञान समय के अनुसार भी उपयुक्त होनी चाहिए। गहन ज्ञान की बुनियाद पर बनी इमारत को मजबूती से खड़ा होने में स्किल और एटीट्यूड की खास मददगार होती है। हम साइंस ओर कामर्स, तथा आर्टस ह्रनिटीज, आदि जो पढ़ाई करते है। उससे विषय को समझने में मदद मिलती है। लेकिन ऐसे नालेज की सार्थकता तभी है। जब उसे व्यवहारिक रुप दिया जा सके। वैसे किताबी ज्ञान किसी मतलब का नहीं होता। ,जो किसी काम न आ सके । ज्ञान का उपयोग करने में समझदारी है।

नालेज किसी भी तरह का हो , वह कभी बेकार नहीे जाता । हां , आपको बस अपने उस ज्ञान का बेहतर उपयोग करके सेल करने का हुनर आना चाहिए।



*मनोज सिंह पटेल*


*मान्यता प्राप्त पत्रकार*

*उत्तर प्रदेश सरकार*


*न्यूज़ 18*


*जौनपुर*

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