जरायम की दुनिया में हलचल, पूर्वांचल के 'बाहुबली-2' बने विजय मिश्रा
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भदोही। मिर्जापुर के एमएलसी चुनाव में रामलली मिश्रा की जीत ने ज्ञानपुर के सपा विधायक विजय मिश्रा को पूर्वांचल का बाहुबली-2 बना दिया है। इससे पूर्वांचल में नए सियासी समीकरण बनने शुरू हो गए हैं। इस बात को लेकर सबसे अधिक जरायम की दुनिया में हलचल मची हुई है। खास तौर से उन माफियाओं में जो पिछले एक दशक से मिर्जापुर और सोनभद्र में स्वर्णिम खनन से लाल होते रहे हैं।
इलाहाबाद के बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद की यारी ने विधायक विजय मिश्रा की ताकत दो गुना अधिक बढ़ा दी है, जिससे जरायम की दुनिया की 'दूसरी ताकत' इस बात को लेकर हैरान है कि विधानसभा चुनाव में यदि विजय मिश्रा का जादू चला तो कइयों का गणित फेल हो सकती है।
दो दशक पहले विधायक विजय मिश्रा को मुख्तार अंसारी का करीबी माना जाता था। सपा के टिकट पर 2002 में ज्ञानपुर से विधायक बनने के बाद विजय मिश्रा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2008 के भदोही विधानसभा के उप-चुनाव में उन्होंने अकेले दम पर भदोही से सपा प्रत्याशी मधुबाला पासी को जिता कर सदन में भेजा था। वहीं लोकसभा चुनाव में प्रतापपुर में फायरिंग की घटना के बाद विधायक को फरार होना पड़ा। इसके बाद इलाहाबाद के तत्कालीन काबीना मंत्री नंद गोपाल नंदी पर रिमोट बम हमले की घटना में भी उनका नाम आया। इस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने पुलिस लगा दी। हालांकि वेश बदलकर फरारी काटने के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद उन्हें नैनी जेल समेत कई जेलों का सफर करना पड़ा। अब एमएलसी चुनाव में विजय मिश्रा की पत्नी रामलली मिश्रा ने बसपा के एमएलसी रहे विनीत सिंह के भाई त्रिभुवन सिंह को महज दस दिनों में पराजित कर पूरे पूर्वांचल में अपना झंडा गाड़ दिया है। विनीत की पराजय से डॉन से माननीय बने एमएलसी बृजेश सिंह कुनबे को भी सुकून मिला है। क्योंकि चंदौली जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर बृजेश की पुत्रवधू और विधायक सुशील की पत्नी की हार के बाद उनका कुनबा सकते में था। मौजूदा समय में विधायक विजय मिश्रा ने एक बार फिर अपने पुराने साथी बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद को गले लगाकर जिस तरह से पूर्वांचल की धरती ज्ञानपुर से बाकी अपराधियों और माफियाओं को ठीक करने का एलान किया उससे जरायम की दुनिया की दूसरी ताकत सकते में आ गई है। सामने विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में पूर्वांचल में अपना अपना प्रभाव कायम करने के लिए बाहुबलियों की बिसात बिछने लगी है। देखने वाली यह होगी कि आने वाले समय में सियासत से लेकर जरायम की दुनिया में और क्या क्या नए समीकरण बनते हैं।
पूर्वांचल में बाहुबली के रूप में एमएलसी बृजेश सिंह का नाम सबसे पहले आता है। हालांकि बृजेश की राजनीतिक लिहाज से भले ही ऊंची पकड़ हो, लेकिन जनाधार नहीं है। जनाधार के मामले में पूर्वांचल में जरायम की दुनिया से इतर बाहुबली विधायक विजय मिश्रा की पहचान जन सेवक के रूप में बनती जा रही है। यही कारण रहा है कि बृजेश भी उनकी जनसेवक की छवि प्रभावित हैं। हालांकि बृजेश पर बीजेपी डोरे डाल चुकी है। यदि बृजेश बीजेपी का चेहरा बनें तो पूर्वांचल में उनकी काट के तौर पर सपा विधायक विजय मिश्रा को स्टार प्रचारक के रुप में उतार सकती है। विजय मिश्रा ने भी मंच से यह संकेत दे दिया है। मिर्जापुर और सोनभद्र में खनन के ठेका हथियाए माफियाओं में विधायक विजय मिश्रा की पत्नी रामलली मिश्रा की जीत से बेचैनी बढ़ गई है। दोनों जिलों के जरायम की दुनिया से जुड़े ठेकेदारों के हालात पर गौर करे माफिया से एमएलसी रह चुके विनीत सिंह, माफिया शूटर मुन्ना बजरंगी, सजायाफ्ता माफिया पूर्व विधायक उदयभान उर्फ डाक्टर सिंह, मुख्तार खेमें में ताल्लुक रखने वाले अमीनुद्दीन उर्फ अमीन अंसारी समेत बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ के भी कई माफिया गिरोहों से वास्ता रखने वाले ठेकेदार सक्रिय हैं।
दो दशक पहले विधायक विजय मिश्रा को मुख्तार अंसारी का करीबी माना जाता था। सपा के टिकट पर 2002 में ज्ञानपुर से विधायक बनने के बाद विजय मिश्रा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2008 के भदोही विधानसभा के उप-चुनाव में उन्होंने अकेले दम पर भदोही से सपा प्रत्याशी मधुबाला पासी को जिता कर सदन में भेजा था। वहीं लोकसभा चुनाव में प्रतापपुर में फायरिंग की घटना के बाद विधायक को फरार होना पड़ा। इसके बाद इलाहाबाद के तत्कालीन काबीना मंत्री नंद गोपाल नंदी पर रिमोट बम हमले की घटना में भी उनका नाम आया। इस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने पुलिस लगा दी। हालांकि वेश बदलकर फरारी काटने के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद उन्हें नैनी जेल समेत कई जेलों का सफर करना पड़ा। अब एमएलसी चुनाव में विजय मिश्रा की पत्नी रामलली मिश्रा ने बसपा के एमएलसी रहे विनीत सिंह के भाई त्रिभुवन सिंह को महज दस दिनों में पराजित कर पूरे पूर्वांचल में अपना झंडा गाड़ दिया है। विनीत की पराजय से डॉन से माननीय बने एमएलसी बृजेश सिंह कुनबे को भी सुकून मिला है। क्योंकि चंदौली जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर बृजेश की पुत्रवधू और विधायक सुशील की पत्नी की हार के बाद उनका कुनबा सकते में था। मौजूदा समय में विधायक विजय मिश्रा ने एक बार फिर अपने पुराने साथी बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद को गले लगाकर जिस तरह से पूर्वांचल की धरती ज्ञानपुर से बाकी अपराधियों और माफियाओं को ठीक करने का एलान किया उससे जरायम की दुनिया की दूसरी ताकत सकते में आ गई है। सामने विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में पूर्वांचल में अपना अपना प्रभाव कायम करने के लिए बाहुबलियों की बिसात बिछने लगी है। देखने वाली यह होगी कि आने वाले समय में सियासत से लेकर जरायम की दुनिया में और क्या क्या नए समीकरण बनते हैं।
पूर्वांचल में बाहुबली के रूप में एमएलसी बृजेश सिंह का नाम सबसे पहले आता है। हालांकि बृजेश की राजनीतिक लिहाज से भले ही ऊंची पकड़ हो, लेकिन जनाधार नहीं है। जनाधार के मामले में पूर्वांचल में जरायम की दुनिया से इतर बाहुबली विधायक विजय मिश्रा की पहचान जन सेवक के रूप में बनती जा रही है। यही कारण रहा है कि बृजेश भी उनकी जनसेवक की छवि प्रभावित हैं। हालांकि बृजेश पर बीजेपी डोरे डाल चुकी है। यदि बृजेश बीजेपी का चेहरा बनें तो पूर्वांचल में उनकी काट के तौर पर सपा विधायक विजय मिश्रा को स्टार प्रचारक के रुप में उतार सकती है। विजय मिश्रा ने भी मंच से यह संकेत दे दिया है। मिर्जापुर और सोनभद्र में खनन के ठेका हथियाए माफियाओं में विधायक विजय मिश्रा की पत्नी रामलली मिश्रा की जीत से बेचैनी बढ़ गई है। दोनों जिलों के जरायम की दुनिया से जुड़े ठेकेदारों के हालात पर गौर करे माफिया से एमएलसी रह चुके विनीत सिंह, माफिया शूटर मुन्ना बजरंगी, सजायाफ्ता माफिया पूर्व विधायक उदयभान उर्फ डाक्टर सिंह, मुख्तार खेमें में ताल्लुक रखने वाले अमीनुद्दीन उर्फ अमीन अंसारी समेत बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ के भी कई माफिया गिरोहों से वास्ता रखने वाले ठेकेदार सक्रिय हैं।

