अभिमान से ज्ञान व क्रोध से नष्ट होता है विवेकः ज्ञानेश्वरानन्द
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जौनपुर। जनपद सुइथाकला विकास खण्ड स्थित अहियाई गांव में चल रहे सात दिवसीय मानस कथा के समापन अवसर पर प्रयाग की पावन धरती से पधारे संत ज्ञानेश्वरानन्द जी महाराज ने कहा कि विवेकशील ज्ञानी पुरुष में यदि क्रोध व अहंकार का समावेश हो जाय तो उसकी भी बुद्धि भ्रमित हो जाती है और वह विवेक शून्य हो जाता है। परशुराम-लक्ष्मण संवाद के प्रसंग की कथा के अनुक्रम में उन्होंने कहा कि परशुराम जैसे तपस्वी व महान ज्ञानी के अंदर क्रोध जागृत हुआ तो वह भी परमात्मा श्रीराम को नहीं पहचान पाये। रामकथा का आयोजन ब्रह्मचारी दूबे ने किया जहां मंचासीन विद्वत जनों का अभिनन्दन जनकधारी दूबे ने किया। इस अवसर पर राजेन्द्र सिंह, साधु तिवारी, मानिक चन्द्र तिवारी, महेन्द्र तिवारी, दयाशंकर दूबे सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।

