अरसे बाद स्थापित हुई राजा जौनपुर की प्रतिमा

जौनपुर। राजा श्रीकृष्ण दत्त स्नातकोतर महाविद्यालय जौनपुर के प्रांगड़ में आज महावि़द्यालय के संस्थापक राजा जौनपुर स्व0 यादवेन्द्र दत्त दुबे की प्रतिमा का अनावरण किया गया। कार्यक्रम के मुख्यअतिथि क्षेत्रीय उच्च शिक्षा निदेशक वाराणसी डा. कमला कांत तिवारी ने मूर्ति का अनावरण किया। इसके उपरान्त वैदिकमंत्रोचार के साथ मूर्ति की पूजा एवं प्राणप्रतिष्ठा ज्योतिषाचार्य डा0 रजनीकांत त्रिपाठी, डा0 गंगाधर शुक्ला के द्वारा सम्पन्न कराया गया।
               समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यअतिथि क्षेत्रीय उच्च शिाक्षा निदेशक वाराणसी डा. कमला कांत तिवारी ने कहा कि राजा यादवेन्द्र दत्त दुबे एक विद्वान, राजनीतिज्ञ, समाजसेवी, शिक्षा रिशी एवं बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। राज साहब कहा करते थे, सूर्य से बाहर का प्रकाष मिलता है, लेकिन षिक्षा से अन्तर जगत प्रकाषित होता है, जिससे एक षिक्षित समाज का निर्माण होता है। वे सदैव जनसेवा, समाज कल्याण एवं षिक्षा के लिए समर्पित थे। वे षिक्षा प्रेमी विद्याअनुरागी थे। डा. तिवारी ने कहा कि राजा जौनपुर जनपद वासियों के लिए प्रेरणा के स्त्रोत हैं। उन्होंने महाविद्यालय की स्थापना कर एक पुनीत कार्य किया है। आज उनकी मूर्ति का अनावरण किया जाना गर्व की बात है।
            विशिष्ठ अतिथिद्वय डा. लालजी त्रिपाठी पूर्व प्राचार्य मड़ियाहू पी जी कालेज, ने कहा कि राजा यादवेन्द्र तेजस्वी एवं ओजस्वी व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति थे। वे जनपद के ही नहीं वरन पूरें प्रदेश की पहचान थे। कुषल राजनीतिज्ञ, समाजसेवी एवं षिक्षा के प्रति समर्पित व्यक्ति थे। उनकी जितनी प्रशंसा की जाए वह कम है।  विशिष्ठ अतिथि डा. यूपी सिंह पूर्व प्राचार्य तिलकधारी महाविद्यालय जौनपुर, ने कहा कि राजा यादवेन्द्र दत्त दुबे की मूर्ति अनावरण फख्र की बात है। आज वे नहीं हैं फिर भी उनके अच्छे कर्म से हम सभी के दिल में हैं, और उनका नाम बढ़े ही आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है। महाविद्यालय के प्राचार्य डा0 विष्णु चन्द्र त्रिपाठी ने समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि स्व0 राजा साहब का जीवन, राजनीति और षिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आप ने महाविद्यालय की स्थापना समाज में उच्च षिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए किया। राजा साहब जनपद वासियों के लिए प्रेरणा के स्त्रोत हैं। वे मानवतावादी दृष्टीकोण से युक्त युग पुरूष थे। आज प्रांगड़ में उनकी मूर्ति की स्थापना किया जाना बढ़े हर्ष एवं गर्व का विषय है। उन्हीं के आर्षिवाद से महाविद्यालय आज प्रगति के पथ पर अग्रसर है। इसके पूर्व समारोह का शुभारम्भ मुख्यअतिथि, विषिष्ठ अतिथि एवं प्राचार्य द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलन  कर किया गया। महाविद्यालय के छात्र/छात्रआंे ने आकर्षक, मनमोहक, सास्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इसके उपरान्त महाविद्यालय मे सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्र/छात्रओं को मुख्यअतिथि द्वारा मेडल देकर सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया। सरस्वती गीत वंदना राय ने प्रस्तुत किया एवं स्वागत गीत गरिमा यादव एवं वंदना राय ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डा0 आरपी ओझा ने किया।
              इस अवसर पर डा0 षिव प्रसाद ओझा पूर्व प्राचार्य, डा0 मयानंद उपाध्याय, डा0 अवधेष द्विवेदी, डा0 अखिलेष्वर शुक्ला, डा0 आषाराम यादव, डा0 मनोज वत्स, डा0 विजय प्रताप तिवारी, डा0 ओम प्रकाष दूबे, डा0 अभय प्रताप सिंह, डा0 ओमप्रकाष दूबे, डा0 राजेन्द्र प्रसाद सिंह, डा0 सुधाकर शुक्ला, डा0 समर बहादुर सिंह अध्यक्ष पुर्वान्चल विष्वविद्यालय षिक्षक संघ, विजय प्रताप सिंह महामंत्री षिक्षक संघ, डा0 ब्रिजेष यदुवंषी, डा0 हिमांषू सिंह, डा0 अनुराग मिश्रा डा0 अनिल प्रताप सिंह, डा0 जीसी चैबे, सुभाष सिंह प्राधानाचार्य बीआरपी इण्टर कालेज, डा0 उर्मिला सिंह, डा0 सुधा सिंह, डा0 ज्योत्सना सिंह, डा0 माया सिंह, डा0 नीता सिंह, डा0 सुनिता गुप्ता, सहित सभी षिक्षक षिक्षणेतक कर्मचारी उपस्थित रहें। अंत में प्राचार्य डा0 विष्णु चन्द त्रिपाठी ने आभार व्यक्त किया।

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