जला कर ठिकाने लगाया जा रहा कचरा
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जौनपुर। खुले में कूड़ा जलाने पर रोक है, बावजूद इसके सफाईकर्मी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। जलते हुए कूड़े से निकलने वाला धुआं सांसों में जहर घोल रहा है, जिससे लोग श्वास संबंधी बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। नगर निकायों में खुले में कूड़ा न जलाया जाए इसको लेकर कानून है, साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का रुख भी सख्त है। नियम तोड़ने पर जुर्माने का प्रावधान भी है। मगर, जिम्मेदारों की अनदेखी से घरों व सफाई से निकलने वाला कूड़ा निकायों में तैनात सफाईकर्मी जहां तहां एकत्र कर आग के हवाले कर देते हैं। कूड़ा निस्तारण के इस तरीके से निकलने वाली घातक गैस आबोहवा को दम घोटू बना रही हैं। बढ़ते वायु प्रदूषण से लोग बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। निकाय प्रशासन की उदासीनता के चलते कचरा जलाकर ठिकाने लगाया जा रहा है। इस अपराध का पर्यवेक्षण करने वाले जिम्मेदार भी चुप्पी साधे हुए हैं। हालात ये हैं कि किसी भी नगर निकायों में ठोस कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके चलते आबादी के बीच या फिर जलस्रोतों के करीब कूड़ा फेंका जा रहा है। अधिकांश जगहों पर कूड़ा जलता कभी भी देखा जा सकता है। जलते कूड़े से कार्बन डाइ आक्साइड व कार्बन मोनो आक्साइड गैस निकलती है। दोनों ही गैस स्वास्थ्य की दृष्टि से जहरीली मानी जाती हैं। वातावरण में इन गैसों की अधिकता से सांस से बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। जबकि प्लास्टिक, टायर व इलेक्ट्रानिक्स आदि का कबाड़ जलाने से उठने वाला धुआं कैंसर का वाहक बनता है। एलर्जी भी हो सकती है। अधिशासी अधिकारी कहते हैं कूड़े में प्लास्टिक बहुत नुकसानदायक हैं। कूड़ा जलाने पर रोक है। सफाई नायकों व सफाईकर्मियों को इससे अवगत कराया करा दिया गया है। जिस भी क्षेत्र के कूड़ा पड़ाव घर में कूड़ा जलता पाया जाएगा उस क्षेत्र के सफाई नायक को इसका जिम्मेदार माना जाएगा। जनता को भी इसमें सहयोग करना चाहिए और कूड़े में आग कदापि न लगाएं।
