लक्ष्य से भटकी मातृ वन्दना योजना
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जौनपुर। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जिले में अपने लक्ष्य से भटकती नजर आ रही है। लेटलतीफी और तकनीकी दिक्कतों के चलते लक्ष्य के करीब 60 फीसद आवेदन ही हो सके हैं और करीब 30 फीसद को ही लाभ मिल सका जबकि वित्त वर्ष समाप्ति के करीब है। केंद्र सरकार ने इस योजना को 1 जनवरी 2017 से लागू तो कर दिया था लेकिन स्पष्ट दिशा-निर्देश न मिलने के कारण फीडिग आदि का काम शुरू नहीं हो सका। करीब पांच महीने पहले विभाग ने प्रसूताओं और गर्भवती महिलाओं का डॉटा अपलोड करना शुरू किया, लेकिन इसमें तकनीकी खामी आ गई। यह डॉटा संबंधित क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता के जरिए ही पड़ना था। जबकि कई कार्यकर्ताओं के ही ऑनलाइन पंजीकरण में देरी हुई। इसके बाद फीडिग शुरू कराई गई। लेकिन अभी भी इसकी रफ्तार सुस्त ही है। जिसके चलते गर्भवती तो दूर, प्रसूता महिलाओं का भी पूरा डॉटा अपलोड नहीं हो सका। ऐसी हालत मंे पात्र महिलाओं को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस योजना के तहत पहली बार गर्भवती महिलाओं को सरकार कुल पांच हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराती है। धनराशि सीधे संबंधित महिला के बैंक खाते में तीन किश्तों में भेजे जाने का प्रावधान है। गर्भवती महिला का पंजीकरण होने पर एक हजार रुपये की पहली किस्त और छह महीने बाद जांच कराने पर दो हजार रुपये की दूसरी किस्त भेजी जाती है। जबकि प्रसव के बाद नवजात शिशु का पंजीकरण एवं पहला टीका चक्र पूरा होने के बाद तीसरी और अंतिम किस्त के रूप में दो हजार रुपये का भुगतान किया जाता है। जिले की हर तीसरी महिला एनीमिया और कुपोषण से जूझ रही है। जिसके चलते गर्भ में आते ही शिशु कुपोषण का शिकार हो जाता है। दरअसल यह स्थिति अधिकांश मामलों में आर्थिक तंगी को लेकर होती है। गर्भवती महिलाओं को खानपान की अधिक जरूरत होती है। वहीं, प्रसव के बाद प्रसूता का उचित खानपान और नवजात बच्चे की अच्छी देखभाल जरूरी होती है। योजना का यही उद्देश्य है कि दिए जाने वाले पांच हजार रुपये से जच्चा-बच्चा को जरूरी सुविधाएं मिलती रहें। नवजात शिशु और गर्भवती महिलाओं की मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।

