संघर्ष और बलिदान की शताब्दी: पंवारा में भाकपा शताब्दी वर्ष समारोह भव्य रूप से सम्पन्न
समारोह में “संघर्ष और बलिदान की शताब्दी” विषय पर विचार व्यक्त करते हुए मुख्य वक्ता डॉ. आनंद दीपायन (बीएचयू) ने भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के विभिन्न ऐतिहासिक और वैचारिक आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य का विश्लेषण करते हुए अन्य विपक्षी दलों के साथ एकता और साझा संघर्ष की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही नई किसान नीति, नई शिक्षा नीति, नई आर्थिक नीति और नई श्रमिक नीति तैयार करने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि ये नीतियां विशेष रूप से शोषित और वंचित वर्ग के हितों के अनुरूप होनी चाहिए।
अन्य वक्ताओं में कामरेड रामा ऊदल (वाराणसी), हामिद अली (आजमगढ़), शारदा पांडेय (सुल्तानपुर), भूलाल पाल (भदोही), जितेंद्र हरि पांडेय (आजमगढ़), हेमंत नंदन ओझा, राजमणि पांडेय (प्रतापगढ़), पूर्व जिला मंत्री कल्पनाथ गुप्ता, भाकपा जिला सचिव सालिक राम पटेल, सुभाष पटेल, राकेश मौर्य, सत्य नारायण पटेल, जगन्नाथ शास्त्री, विजय यादव उदल, लालजी यादव, सुधा सिंह सहित कई नेताओं ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जौनपुर के सबसे वरिष्ठ सदस्य कामरेड बाबा मंटू राम द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुई। बाहर से आए भाकपा नेताओं एवं स्थानीय नेताओं ने शहीद स्तंभ तथा दिवंगत वरिष्ठ नेताओं के चित्रों पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
समारोह की अध्यक्षता कामरेड रामनाथ यादव, मंजू शास्त्री और सुभाष गौतम के अध्यक्ष मंडल ने की, जबकि संचालन वरिष्ठ भाकपा नेता कामरेड जय प्रकाश सिंह एडवोकेट ने किया।
इस अवसर पर ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (एआईएसएफ) द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, समर्थक और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

