सरकारी डाक्टर और प्राइवेट अस्पताल संचालक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज

 जौनपुर। प्रसव के दौरान आपरेशन के समय प्रसूता की मौत के मामले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मड़ियाहूं के सर्जन व निजी अस्पताल के संचालक के विरुद्ध मंगलवार को गैर इरादतन हत्या का मुकदमा कोतवाली में दर्ज हुआ। प्रसूता की मौत के बाद परिजनो ने अस्पताल के बाहर सोमवार की रात में जमकर हंगामा किया था। पुलिस मामले में छानबीन कर रही है।   

 मड़ियाहूं कोतवाली क्षेत्र के मिश्राना मोहल्ला निवासी ललिता मौर्या (28) के पति अजय कुमार मौर्य रोजी रोजगार के सिलसिले में मुंबई रहते हैं। वह अपने मायके ग्राम गहलाई थाना बरसठी में रह रही थीं। गत सोमवार को दिन में प्रसव पीड़ा होने पर गांव में ही स्थित महिला चिकित्सक डा. रेनू यादव की क्लीनिक पर उसका भाई प्रसव के लिए ले गया। डा. रेनू यादव हालत गंभीर बताते हुए महिला के आपरेशन के लिए मड़ियाहूं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पास स्थित राजन हास्पिटल ले आकर भर्ती कराई। 
परिजन का आरोप है कि मड़ियाहूं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत चिकित्सक डा. दीप्त कुमार ने राजन हास्पिटल आकर लगभग एक बजे आपरेशन किया। इसके बाद प्रसूता को रक्तस्त्राव होने लगा, जो बंद नहीं हो पाया। अधिक रक्त निकलने के कारण उसकी हालत गंभीर हो गई तो चिकित्सक के हाथ-पांव फूल गए। परिजनों को रक्त लाने के लिए जौनपुर भेज दिया। आनन-फानन परिजनों को जानकारी दिए बिना ही चिकित्सक व अस्पताल के संचालक एंबुलेंस से प्रसूता को लेकर वाराणसी चले गए। कुछ देर बीतने के बाद फोन करने पर बताया कि वाराणसी के नोवा अस्पताल में लेकर जा रहे हैं। परिवार के लोग जब उस अस्पताल में पहुंचे तो चिकित्सक ने बताया कि अनंत हास्पिटल वाराणसी ले आए हैं। परिवार के लोग जब वहां पहुंचे तो एंबुलेंस में महिला का शव पड़ा था। चिकित्सक व अस्पताल संचालक मौके से गायब थे। 
कोतवाल अशेषनाथ सिंह ने बताया कि नगर के मिश्राना मोहल्ला निवासी संजय कुमार मौर्य की तहरीर पर सीएचसी के चिकित्सक डा. दीप्त कुमार व अस्पताल संचालक डा. राज बहादुर यादव के विरुद्ध गैरइरादतन हत्या का मुकदमा पंजीकृत कर छानबीन की जा रही है। 
 प्रसूता की मौत के बाद अस्पताल का बोर्ड गायब कर कर्मचारी मौके से फरार हो गए हैं। नगर के मिश्राना मोहल्ला निवासी प्रसूता ललिता मौर्या की मौत का यह पहला मामला नहीं है। यहां आएदिन ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। नगर में कई निजी नर्सिंग होम मरीजों के लिए खतरे जान बने हैं। अधिकांश अस्पतालों में सीएचसी के चिकित्सक न सिर्फ खुलेआम प्रैक्टिस कर रहे हैं, बल्कि उनके लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मरीजों को भी बहला-फुसलाकर इन प्राइवेट अस्पतालों में ले जाते हैं। यह सारा खेल विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी में बिदास हो रहा है। दूसरी तरफ कई अस्पताल ऐसे हैं जहां ओटी टेक्नीशियन चिकित्सक बनकर आपरेशन कर रहे हैं।

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