भदोहीः ईंट भट्टों पर धधकती हैं कच्ची शराब की भट्ठियां
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भदोही। सरकार और व्यवस्था के नुामाइंदे अपने
दायित्वों को खूंटी पर टांग कर खर्राटे भरते हैं। लेकिन जब प्रदेश में
जहरीली शराब की कोई घटना हो जाती है तो सरकार, पुलिस और आबाकारी विभाग नींद
से जागता है और शराब माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाता है। एटा में जहरीली
शराब से डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों की मौत के बाद सरकार और प्रशासन की नींद
टूटी है। प्रदेश भर के जिलों में शराब की अवैध भट्टियों के खिलाफ कार्रवाई
शुरु की गयी है। इस अभियान में प्रदेश भर में हजारों लीटर शराब, उसके
केमिकल, बनाने के सामान और लहन बरामद की गयी है। लेकिन यह सब दिखावा है।
बाद में सब कुछ सामान्य हो जाएगा। प्रदेश में उन्नाव, वाराणसी, इलाहाबाद,
आजमगढ़, भदोही, लखनउ में जहरीली शराब कांड सैंकड़ों बेगुनाहों की जान जा चुकी
हैं। लेकिन इसके बाद भी प्रदेश के कई गांवों और सबसे अधिक ईंट भट्ठों पर
कच्ची शराब उतारी जाती है। यह सब पुलिस और आबाकारी विभाग के संरक्षण में
होता है। दूसरी बात इस कारोबारों में इतने रसूखवाले जुड़े होतें है कि पुलिस
उन पर हाथ डालना नहीं चाहती। पुलिस महानिरीक्षक वाराणसी जोन के आदेश पर
भदोही पुलिस ने भी अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाया। जिसमें काफी मात्रा
में कच्ची शराब और उससे संबंधित उपकरण और लोग पकड़े गए। जिले के कई ईंट
भट्ठों और गांवों में शराब का तैयार करने का काला धंधा बेखौफ चलता है।
हलांकि आबकारी अधिकारी इन आरोंपों और भट्ठियों से इनकार करते हैं।
भदोही और वारणसी में पांच साल पूर्व जहरीली शराब कांड में आधे एक
दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस मामले में पुलिस ने बड़ी
कार्रवाई भी की थी लेकिन बावजूद यह अवैध धंधा जारी है। क्यों जारी है पुलिस
और आबकारी विभाग के पास इसका कोई जबाब नहीं है। कई गांवों और ईंट भट्ठों
पर कच्ची शराब उतारी जाती है। यह शराब ईंट चिमनियों पर काम करने वाले
छत्तीसगढ़, झारखंड और मध्यप्रदेश के मजदूर तबकों की तरफ से बनायी जाती है।
यह सब भट्ठा संचालकों की निगरानी में चलता है। प्रदेश में जब भी जहरीली
शराब की घटनाएं होती हैं सरकार के दबाब में छापेमारी शुरु की जाती है।
लेकिन बाद में सब कुछ सामान्य हो जाता है। आम तौर पर पुलिस हर छापेमारी में
अवैध शराब उन्हीं स्थानों पर बरामद करती है जहां जहां पूर्व के छापों में
बरामद करती रही है। सवाल उठता है बार-बार छापेमारी के बाद भी यह गैर कानूनी
धंधा क्यों नहीं बंद होता है। इसका जबाब पुलिस, आबकारी और संरक्षण दाताओं
के पास नहीं होता है। बाजार के मुकाबले यह शराब अधिक नशीली और सस्ती होती
है जिससे इसकी अधिक खपत होती है। कई स्थानों पर केमिकल से जहरीली शराब
बनायी जाती है जिसकी मात्रा अधिक होने पर पीने वालों की जान चली जाती है।
सबसे पहले इसका असर आंखों पर होता है। अभियान में जिले की सुरियावां पुलिस
ने अभिया के एक ईंट भट्ठे से दोपहर में छापा मारकर कच्ची शराब बनाने की
अवैध फैक्टी पकड़ी। पुलिस से मिली जानकारी में दावा किया गया है कि यहां से
25 लीटर तैयार कच्ची शराब के साथ एक कुंतल महुवा की लहन बरामद की गयी। इसके
अलवा शराब बनाने की पांच भट्ठियां पायी गयी। पुलिस बरामद लहर को नष्ट करवा
दिया। जबकि इस मामले में झारखंड के लोहरदंगा थाने के सेनहा निवासी पुनई
नामक व्यक्ति को गिरफतार किया है। पुलिस का दावा है कि उसने गैर कानूनी
शराब बनाने की बात कबूली है। इसके पहले भी यहां छापे में अवैध शराब पकड़ी जा
चुकी है। इसके अलावा पुलिस ने भदोही कोतवाली के लालीपुर गांव के संदीप
नामक युवक के पास से 10 लीटर अवैध शराब बरामद की है। यह बरामदगी सुरियावां
रेलवे के पूर्वी फाटक के पास से की गयी। ज्ञानपुर कोतवाली पुलिस ने बैराखास
गांव से हरिश्चंद्र को 10 लीटर अवैध शराब के साथ गिरफतार किया। इस काले
धंधे का सबसे अधिक शिकार आम गरीब परिवार होता है जो शराब की तलब मिटाने के
लिए मौत के मुंह में चला जाता है। जबकि इस धंधे से जुड़े मालामाल होते हैं।
दारु की बोलत में मौत का जिंद नाचता है जबकि शराब माफिया जेबें दौलत से
भरती हैं। जबकि जिले के चैरी में जहरीली शराब कांड में कई बनवासियों और
दूसरे लोगों की जान चली गयी थी। वहीं जंगीगंज में कुछ साल पहले एक बंद पड़े
सिनेमा घर से पुलिस ने शराब अवैध फैक्टी पकड़ी थी जिसमें बड़े पैमाने पर शराब
गैर कानूनी तरीके से तैयार की जा रही थी। आबकारी और पुलिस विभाग अवैध शराब
के संबंध में चाहे जो दावे करे लेकिन यह गैर कानूनी धंधा जिले में खूब फल
फुल रहा है इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। कई बार पुलिस की छापेमारी
मारी दूसरेर राज्यों की शराब भी बरामद होती है। इससे यह साफ जाहिर होता है
कि इस धंधे से जुड़े लोगों का नेटवर्क कितना तगड़ा है। पुलिस लाख दावा करे
लेकिन यह कारोबार फिरहाल थमने वाला नहीं है क्योंकि पुलिस की मोटी कमायी का
भी यह जरिया बन गया है। इस पूरे मामले पर जब हमने जिलाआबकारी अधिकारी
रामसजीवन से संपर्क किया तो उनका दावा था कि जिले में शराब की फैक्टरियां
नहीं हैं। ईंट भट्ठों पर छापेमारी की जाती है। इस तरह का धंध महानगरों में
होता है। उन्होंने बताया है कि हमारे पास केवल 60 एक्साइज एक्ट का कानून है
उससे अधिक हम कुछ कर नहीं सकते हैं। लोग पकड़ने जाने के बाद कुछ दिन काम
बंद रखते हैं बाद में जेल से छूटने के बाद पुनः शुरु कर देते हैं। आजीवन
कारावास का ऐसा कोई कानून नहीं है कि जिसके बाद इस तरह के धंधे बंद हो
जाएं। यह पूरे प्रदेश की स्थिति है। आबकारी अधिकारी का दावा है कि जिले में
200 से 400 लीटर अवैध शराब की हर माह खपत है। जबकि यह सफेद झूठ हैं पुलिस
की एक दिन छापेमारी में जहां 45 लीटर तैयार शराब बरामद हुई हैं। वहीं एक
कुंतल लहर को पुलिस ने नष्ट किया है। बाहर से जहरीली शराब आने के बाद इस
तरह की घटनाएं होती हैं।

