रहनुमा हर घर का........

रहनुमा हर घर का, साया होता है सहर का। जो घर को रोशन है करता, घर की दिवारो मे, खुशियो के रंग हैभरता। दिवाना होता है,वह अपनी आन का। र...

जौनपुर की शिक्षा व्यवस्था राम भरोसे कई स्कूलों में लटका ताला

जौनपुर। जिले की प्राथमिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा भगवान भरोसे ही चल रहा है। शहर के आसपास के विद्यालयों में तो छात्रो के संख्या से अधिक श...

आगे सफर था और पीछे हमसफर था....

रूकते तो सफर छूट जाता और चलते तो हम सफर छूट जाता... मंजिल की भी हसरत थी और उनसे भी मोहब्बत थी.. ए दिल तू ही बता...उस वक्त मैं कहाँ जाता.....

महँगी रोटी सस्ता मानव, गली गली में बिकता है

 नये दौर के इस युग में, सब कुछ उल्टा दिखता है, महँगी रोटी सस्ता मानव, गली गली में बिकता है। कहीं पिंघलते हिम पर्वत, हिम युग का अंत ...

ज्ञानवान- विद्वान बनाकर, विकसित राष्ट्र बनाना होगा

आज दिलों में अपने हमको, शान्ति दीप जलाना होगा, नफ़रत का संसार मिटाकर, प्यार उजाला लाना होगा। खेल चुके हैं खेल बहुत, अलगाववाद और आरक्षण का...

तुमने प्रीत पहचानी नहीं है, तुम्हारी आंख में पानी नहीं है

 जौनपुर। जनपद हिंदी साहित्य सम्मेलन के तत्वावधान में गुरुवार को काव्य गोष्ठी सत्य प्रकाश 'अनाम' की अध्यक्षता में हुई। आलोक रंजन ...

हर वक्त अपनी ही खामियों को निहारता हूँ मैं

हर वक्त अपनी ही खामियों को निहारता हूँ मैं, देखकर आयना उसमे, कुछ को निखारता हूँ मैं। गैरों के गिरहबान में झांकने की मेरी आदत नहीं, मगर नफर...

मैं जहर का ज़हरा हूँ, बच के रहना मुझसे यारों मैं "जौनपुर" का दोहरा हूँ!!

अजय कुमार पाण्डेय मत करो नादानी मुझसे मैं  "जौनपुर" का दोहरा हूँ !! हो जवानी या बुढ़ापा सबपऱ कहर बन ढहरा हूँ, जिद न कर तू ख...

मेरे जीवन की निधियों के आधार तम्हीं हो सुधर गेह : श्रीपाल सिंह क्षेम

स्व0 वाचस्पति श्रीपाल सिंह क्षेम  स्व0 वाचस्पति श्रीपाल सिंह क्षेम इस जीवन के कण-कण में हैं साकार सलोना मुधुर स्नेह ! मेरे जीवन की निध...

आ रही चली मंथर गति से, मेघालि क्षितिज से धुवाॅधार

स्व 0 वाचस्पति श्रीपाल सिंह क्षेमजी स्व 0 वाचस्पति श्रीपाल सिंह क्षेमजी की रचना   उतरा पावस, आयी बहार !  चल पड़ा मिलन-सा मधुर पवन , ...

‘‘दंगा और इंसानियत‘‘

आओ हम दंगा...दंगा खेलें तुम अल्लाह-ए-अकबर हम हरहर महादेव बोले... खेलना हम सब का पैदाइशी इल्म है तभी दंगा ना कोई जुल्म है हमने जब ...

‘‘संगिनी‘‘

 प्रभुनाथ शुक्ला  तुम मेरी संपूर्णता हो तुम्हारा होना यानी जीवन और आत्मा के अंतर जैसा है तुम मेरी अनुभूति और अनुकृति हो तुम्हारा...

‘‘कागज की कश्ती‘‘

 प्रभुनाथ शुक्ला  ओ कागज की कश्ती ओ बचपन की मस्ती मुझे याद आते है...ं पचपन की उमर में बचपन के सपने गुदगुदाते हैं बारिश के दिनांे...

‘‘हिंदी है देश के माथे कि बिंदी‘‘

प्रभुनाथ शुक्ला   हिंदी है देश के माथे कि बिंदी मिल कर सब बोंले हिंदी-हिंदी विंध्य-हिमाचल व यमुना-गंगा द्राविड़-उत्कल और मिल बंग सि...

बेटी का श्राप

माँ ये तुमने क्या किया! जन्म लेने के पहले ही मुझे मार दिया मैं तो आई थी तुम्हारी गोद में सुरक्षा पाने के लिए अपने नन्हे क़दमों में पै...

अगर परिंदे भी हिन्दू और मुस्लमान हो जाएं

  ये पेड़ ये पत्ते ये शाखें भी परेशान हो जाएं ! सूखे मेवे भी ये देख कर हैरान हो गए.., न जाने कब नारियल हिन्दू और खजूर मुसलमान हो गए.....

मकान और घर

जिस दिन मकान घर मे बदल जायेगा सारे शहर का मिजाज़ बदल जायेगा। जिस दिन चिराग गली मे जल जायेगा सारे गावं का अँधेरा छट जायेगा.। आने ...

“थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे...!!”

भरी जेब ने ' दुनिया ' की पहचान करवाई और खाली जेब ने ' इन्सानो ' की. º•○●º•○●º•○●º•○●º•○● जब लगे पैसा कमाने, तो समझ आ...

गुणवान मिलते कहाँ?

आज कांग्रेस के कुछ मित्रों ने केन्द्रीय मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी की शिक्षा को लेकर कुछ अभद्र टिप्पणी की, उन महानुभाव को समर्पित कुछ प...

जो बदल सकते हैं अंगुली के निशान से पहाड़, आदमी नहीं वो अवतार होते हैं......

 जौनपुर। साहित्यिक व सामाजिक संस्था ‘अपूर्वा भारती’ के बैनर तले भारती नगर स्थित इंग्लिश क्लब में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आ...


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