कृषि तकनीकी सहायको को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत
https://www.shirazehind.com/2017/03/blog-post_89.html
जौनपुर। कृषि विभाग मे कार्यरत तकनीकी सहायको को शुक्रवार को सुप्रीम
कोर्ट ने बड़ी राहत प्रदान की है। जिनको हाई कोर्ट ने आरक्षण मे धांधली का
आरोप लगाकर पुनः चयन करने का आदेश दिया था । इस फैसले से एक वर्ष से सेवा
दे रहे कृषि तकनीकी सहायको के भविष्य पर खतरा मडराने लगा था वही विभाग मे
भी हड़कम्प मचा हुआ था । फैसले के खिलाफ कार्यरत कर्मियो ने सुप्रीम कोर्ट
से न्याय की अपील की तो सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करते
हुए अन्तिम निर्णय आने तक सेवा बहाल रखने का आदेश दिया है।
बताते चले कि लोकसेवा आयोग द्वारा वर्ष 2013 मे 6628 कृषि तकनीकी सहायक पद हेतु विज्ञापन निकाला गया जिसमे पिछड़ी जातियों को 27%आरक्षण देने के वजाय मात्र 8% ही दिया गया। जहा विज्ञापन मे पिछड़ों के लिए 1789 पद होने चाहिए वहा मात्र 566 पद ही दिया गया। अपना हक जाते देख पिछड़ी जाति के अभ्यर्थियो ने 27% की मांग को लेकर राज्य पिछड़ा वर्ग मे अपील किया। सुनवाई होने से पूर्व लिखित परीक्षा करा ली गयी तो इसी दरम्यान राज्य पिछड़ा वर्ग ने शासन को पिछड़ो को मिलने वाले 27% उक्त नियुक्ति मे हक दिए जाने का आग्रह किया तो शासन ने विभाग से मात्रात्मक डाटा मांग लिया । विभाग द्वारा उपलब्ध कराये गए डाटा के ही आधार पर नियुक्ति का आदेश शासन ने लोक सेवा आयोग को दिया। इण्टरब्यूव के पहले आयोग ने सीटो का वटवारा मात्रात्मक डाटा के आधार पर चयनित कर योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति हेतु कृषि विभाग को सौप दिया । अचयनित अभ्यर्थियों ने आरक्षण मे धांधली का आरोप लगते हुए हाई कोर्ट मे मुकदमा कर दिया चयनितों का पक्ष सुने वगैर पुनः चयनित सूची बनाने का आदेश हो गया तो चयनित हतप्रद रह गए। उक्त आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट मे न्याय की अपील किये तो सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को स्थगित करते हुए नियुक्ति पाए अभ्यर्थियों की सेवा अग्रिम आदेश तक बहाल कर उन्हें बड़ी राहत प्रदान की है।
बताते चले कि लोकसेवा आयोग द्वारा वर्ष 2013 मे 6628 कृषि तकनीकी सहायक पद हेतु विज्ञापन निकाला गया जिसमे पिछड़ी जातियों को 27%आरक्षण देने के वजाय मात्र 8% ही दिया गया। जहा विज्ञापन मे पिछड़ों के लिए 1789 पद होने चाहिए वहा मात्र 566 पद ही दिया गया। अपना हक जाते देख पिछड़ी जाति के अभ्यर्थियो ने 27% की मांग को लेकर राज्य पिछड़ा वर्ग मे अपील किया। सुनवाई होने से पूर्व लिखित परीक्षा करा ली गयी तो इसी दरम्यान राज्य पिछड़ा वर्ग ने शासन को पिछड़ो को मिलने वाले 27% उक्त नियुक्ति मे हक दिए जाने का आग्रह किया तो शासन ने विभाग से मात्रात्मक डाटा मांग लिया । विभाग द्वारा उपलब्ध कराये गए डाटा के ही आधार पर नियुक्ति का आदेश शासन ने लोक सेवा आयोग को दिया। इण्टरब्यूव के पहले आयोग ने सीटो का वटवारा मात्रात्मक डाटा के आधार पर चयनित कर योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति हेतु कृषि विभाग को सौप दिया । अचयनित अभ्यर्थियों ने आरक्षण मे धांधली का आरोप लगते हुए हाई कोर्ट मे मुकदमा कर दिया चयनितों का पक्ष सुने वगैर पुनः चयनित सूची बनाने का आदेश हो गया तो चयनित हतप्रद रह गए। उक्त आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट मे न्याय की अपील किये तो सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को स्थगित करते हुए नियुक्ति पाए अभ्यर्थियों की सेवा अग्रिम आदेश तक बहाल कर उन्हें बड़ी राहत प्रदान की है।
