फाइलेरिया दिवस कार्यक्रम का शुभारम्भ

जौनपुर । जिला चिकित्सालय में मुख्य चिकित्साधिकारी ओपी सिंह द्वारा स्वयं एवं अन्य लाभार्थियों को फाइलेरिया की दवा खिलाकर राष्ट्रीय फाइलेरिया दिवस कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि कुल जनसंख्या के लगभग 10 प्रतिशत लोग ऐसे है जिनके रक्त में फाइलेरिया परजीवी के विद्यमान होने की सम्भावना रहती है। इसमें से अधिकांश ऐसे लोग है जिनके रक्त में आजीवन फाइलेरिया के लक्षण परिलक्षित नही होते परन्तु कुछ के विद्यमान होने की की सम्भावना बनी रहती है। इसमें से अधिकांश ऐसे लोग है जिनके शरीर में इस बीमारी की खास बात यह है कि बीमारी के लक्षण के उपरान्त आजीवन समाप्त नही हो पाते है। बचाव इस बीमारी के प्रबन्धन सबसे कारगर उपाय है। यह बीमारी एक परजीवी ’’वुचरेरिया बैंक्रोफ्टाई’’ के द्वारा होता है। मादा क्युलेक्स मच्छर के काटने से यह बीमारी रोगी व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में फैलती है। भारत सरकार के विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष में आयु वर्ग के अनुसार डी.आई.सी. की एक खुराक लगातार पाॅच वर्षो तक सेवन करने सेवन करने से बीमारी के लक्षण होने की सम्भावना नगण्य हो जाती है। विगत वर्षो से यह कार्यक्रम जिले में चलाया जा रहा है। 19 मार्च से 21 मार्च  तक यह कार्यक्रम चलाया जायेगा। कार्यक्रम के अन्र्तगत 50 घरों अथवा 250 लाभार्थियों को 6195 ड्रग एडमिनिस्टेªटर के द्वारा घर-घर जाकर अपने सामने दवा खिलाया जायेगा। डीईसी की गोली 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को नहीं खिलानी है। दवा खाली पेट नहीं खानी है। कार्यक्रम के अन्तर्गत कुल 4110608 जनपद वासियों को आयु वर्ग के अनुसार दवा खिलाया जायेगा।  कार्यक्रम के पूर्व की गतिविधियों में रात्रि रक्त पटिट्का बनाकर उसका जाॅच किया जाता है। रात्रि पटिट्का सर्वे में कुल 4058 रक्त पटिट्का बनाया गया था जिसमें 10 नमूने धनात्मक पाये गये जो निर्धारित मानक धनात्मकता एक प्रतिशत से कम के अन्र्तगत है।

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