सांसद प्रिया सरोज की छवि बिगाड़ने की साजिश! , एआई जनित फर्जी तस्वीरें वायरल करने पर मुकदमा दर्ज

 

फाइल फोटो, प्रिया सरोज सांसद मछलीशहर
जौनपुर। मछलीशहर लोकसभा सीट से सांसद प्रिया सरोज की छवि धूमिल करने के लिए सोशल मीडिया पर एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से तैयार की गई कथित फर्जी और मॉर्फ्ड तस्वीरें वायरल करने का मामला अब पुलिस तक पहुंच गया है। सांसद की शिकायत पर बीजेपी के जिला मीडिया प्रभारी समेत दो लोगों के विरूद्ध साइबर क्राइम थाने में गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

एफआईआर के अनुसार सांसद प्रिया सरोज ने आरोप लगाया है कि अमोद सिंह और विशाल सिंह नामक व्यक्ति के फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट्स द्वारा उनकी एडिटेड व फर्जी तस्वीरें तथा भ्रामक सामग्री सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही थी। इन पोस्टों के जरिए उनकी राजनीतिक और सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की सुनियोजित कोशिश की गई। आमोद सिंह बीजेपी के जिला मीडिया प्रभारी है।

सांसद ने अपने शिकायती पत्र में कहा है कि यह केवल व्यक्तिगत हमला नहीं बल्कि एक निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि की गरिमा को ठेस पहुंचाने और जनता के बीच उनकी छवि खराब करने की साजिश है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर क्राइम थाना वाराणसी ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं सहित आईटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। एफआईआर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने, मानहानि, अश्लील एवं भ्रामक कंटेंट साझा करने और साइबर अपराध से संबंधित धाराएं शामिल की गई हैं।

शिकायत में जिन सोशल मीडिया अकाउंट्स और लिंक का उल्लेख किया गया है, उनके स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी पुलिस को सौंपे गए हैं। साइबर सेल अब संबंधित अकाउंट्स की तकनीकी जांच कर पोस्ट अपलोड करने वालों की पहचान में जुट गई है।

सांसद प्रिया सरोज ने कहा कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल अभिव्यक्ति के लिए होना चाहिए, न कि किसी की प्रतिष्ठा खराब करने के लिए। एआई तकनीक का दुरुपयोग कर फर्जी तस्वीरें बनाना और उन्हें वायरल करना गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की हरकत करने की हिम्मत न कर सके।

मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। वहीं साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि एआई तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ फर्जी तस्वीरों और मॉर्फ्ड कंटेंट के जरिए लोगों को बदनाम करने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिन पर प्रभावी नियंत्रण समय की बड़ी आवश्यकता बन गया है।

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