बिना विसरा जांच के कैसे बता दिया कि मृतक के शरीर में नहीं मिली जहरीली शराब

 जौनपुर।  पुलिस और स्वास्थ्य विभाग अपने अजीबोगरीब कारनामों को लेकर अक्सर चर्चा में बने रहते हैं।हाल ही में सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के पकड़ी गांव में दंपति की मौत जहरीली शराब से होने की बात खबरों के माध्यम से प्रकाश में आई।किसी भी व्यक्ति की मृत्यु का कारण पता करने के लिए पोस्टमार्टम कराया जाता है।

 मृतक रामवृक्ष का भी पोस्टमार्टम हुआ।जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहरीली शराब की पुष्टि नहीं हुई।रिपोर्ट में फेफड़े में संक्रमण पाया गया।गांव वालों ने जहरीली शराब से मौत की अफवाह फैलाया था।अब पुलिस अफवाह फैलाने वालों की तलाश कर रही है अधिवक्ता हिमांशू श्रीवास्तव ने कहा कि जहां तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट का सवाल है।रिपोर्ट में आमतौर पर यदि कोई व्यक्ति शराब या अन्य कोई पेय पदार्थ पिया है तो आमाशय में लिक्विड की रिपोर्ट आएगी। मुंह की दुर्गंध इत्यादि पुष्टि हो सकती है कि व्यक्ति ने शराब पिया है कि नहीं लेकिन जहां सवाल यह हो कि व्यक्ति की मौत कहीं जहर से तो नहीं हुई है ऐसी स्थिति में पोस्टमार्टम से इस बात की पुष्टि नहीं हो सकती कि मृतक के शरीर में जहर पाया गया या नहीं।ऐसी परिस्थिति में मृतक के शरीर का विसरा जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाता है।जांच में इस बात की पुष्टि होती है कि व्यक्ति की मौत जहर से हुई है या नहीं अथवा कौन सा जहर उसके शरीर में पाया गया।आमतौर पर यदि किसी की मृत्यु जहर खाने से होती है तो विसरा जांच के लिए भेजे जाने पर एलमुनियम फास्फाइड विष पाया जाता है।यह आवश्यक नहीं है कि यही विष पाया जाए।यह इस पर निर्भर करता है कि मृतक के शरीर में किस प्रकार का जहर है। आखिर क्या कारण हो सकता है जिम्मेदार अधिकारियों का इस प्रकार के गैर जिम्मेदाराना वक्तव्य देने का यह प्रश्न विचारणीय है।अधिवक्ता पंकज कुमार श्रीवास्तव व प्रवीण सिंह सोलंकी का कहना है कि शराब में एथेनॉल मेथेनॉल की मात्रा पर निर्भर करता है।जब विसरा जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाता है तब पता चलता है कि किस प्रकार का विष पाया गया।शराब में जहर मृतक के शरीर में पाया गया कि नहीं यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट से नहीं बताया जा सकता।केवल यह बताया जा सकता है कि वह शराब पिया था महक के आधार पर।जहर का मामला पाया जाने पर यह मानक है कि विसरा सुरक्षित किया जाए।यदि शरीर पर कोई वाह्य लक्षण जैसे नाखून या गले पर साइनोसिस पाया गया तो भी डॉक्टर विसरा प्रिजर्व करते हैं और जांच के लिए भेजते हैं।अगर डॉक्टर साइनोसिस लिख दिए तो विसरा करना ही है।मृत्यु का कारण पता न चलने पर विसरा सुरक्षित रखा जाता है और जांच के लिए भेजा जाता है। हो सकता है कि मृत्यु का कारण कोई और हो लेकिन यदि बात यह भी है कि हो सकता है जहरीली शराब पीने से मृत्यु हुई हो तो विसरा सुरक्षित रखकर जांच के लिए भेजा जाना चाहिए और बिना जांच रिपोर्ट के यह नहीं कहना चाहिए कि शरीर में जहरीली शराब नहीं पाई गई।

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