डा. मुखर्जी ने स्वतंत्र भारत का पहला राष्ट्रवादी आंदोलन छेड़ा था

 जौनपुर। डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के लिये राष्ट्रहित सर्वोपरि था। इसके लिये उन्होंने न सिर्फ सत्ता का त्याग किया बल्कि देश की एकता और अखंडता के लिये अपना जीवन भी बलिदान कर दिया। एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान के विरुद्ध डा. मुखर्जी ने स्वतंत्र भारत का पहला राष्ट्रवादी आंदोलन छेड़ा था। यह बातें भारतीय जनता पार्टी नगर दक्षिणी अध्यक्ष अमित श्रीवास्तव ने रासमंडल बल्लोच टोला में डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कही। इस मौके पर जिला मंत्री रविंद्र सिंह दादा ने कहा कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद तथा अंत्योदय को राष्ट्र की प्रगति का आधार मानने वाले डा. मुखर्जी ने कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाने के लिये अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया। नगर महामंत्री सतीश सिंह त्यागी ने कहा कि महान राष्ट्र नायक तथा राष्ट्रवादी राजनीति के पुरोधा श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन हम सब के लिये प्रेरणास्रोत है। नगर उपाध्यक्ष मनोज तिवारी ने डा. मुखर्जी के जीवन पर प्रकाश डाला। उपस्थित पदाधिकारियों ने डा. मुखर्जी के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित किया। इस मौके पर नगर उपाध्यक्ष राजेश कन्नौजिया, अभिषेक श्रीवास्तव, संदीप जायसवाल, अजय सेठ, दीपक मिश्रा, जगमेंद्र निषाद, राहुल निषाद, अभिषेक श्रीवास्तव, विपिन सिंह, प्रशांत निषाद, सूरज तिवारी, रोहित आदि उपस्थित रहे। 

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