गाजे-बाजे के साथ पूजन स्थल पर पहुंची व्रती माताएं

 जौनपुर। पुत्रों के दीर्घायु व मंगलकामना के लिए माताओं ने निर्जला व्रत रखा। शाम को समूह में नदी, तालाब व अन्य जलाशयों के किनारे जीवित्पुत्रिका का पूजन किया। व्रती माताओं ने निर्जला उपवास रखकर विधिवत पूजन-अर्चन के बाद व्रत से जुड़ी कथा का नियमानुसार श्रवण किया। मन्नत पूरी होने पर कई व्रती माताएं गाजे-बाजे के साथ पूजन स्थल पर पहुंची थी।

 मान्यता है कि व्रत रखने वाली माताओं के पुत्र दीर्घजीवी होते हैं और उनके जीवन में आने वाली सारी परेशानियां स्वत: टल जाती हैं। निर्जला उपवास के बाद माताओं ने सामूहिक रूप से जीवितपुत्रिका व्रत कथा का श्रवण किया। ग्रामीण क्षेत्रों में भी माताओं ने उपवास रखकर पूजन-अर्चन किया और पुत्र के दीर्घायु होने की मंगल कामना की। केराकत क्षेत्र के सिपाह मोहल्ला, स्टेशन चौराहा, सर्की, अमहित, सुल्तानपुर, पेसारा, अकबरपुर, छितौना मुर्की, सरायबीरु चौराहा आदि स्थानों पर गोंठ बनाकर पूजा हुई। व्रती महिलाओं ने इस पूजा के दौरान चौक पर जीवितपुत्रिका की पूजन सामग्री, चीनी की मिठाई, चना, रोरी, नारियल व पांच प्रकार के फलों के साथ सामान खरीदारी को बाजारों में महिलाओं की भीड़ दिखी। नगर की शशिकला देवी बताया कि यह व्रत सर्वप्रथम मां पार्वती ने अपने पुत्र भगवान गणेश के लिए रखा था और तब से यह व्रत की परंपरा शुरू हुई है। सभी व्रती महिलाएं शाम को पूजा की थाली सजाकर गोंठ में जाती हैं। गोंठ में जाकर वहां मां पार्वती की सात कहानियां सुनती व सुनाती हैं। पूजन के समय एक दीपक जलाया जाता है। वह दिया जलता हुआ घर तक लेकर जाना होता है और दीपक रात भर जलता है।

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