पूर्व कैबिनेट मंत्री ने दाखिल किया नामाकंन, जानिए जगदीश राय का रानीतिक सफर कब शुरू हुआ

जौनपुर। नामाकंन के आखिरी दिन जफराबाद विधानसभा से सपा गठबंधन के प्रत्याशी जगदीश नारायण राय ने धूम धड़ाके के साथ अपना पर्चा दाखिल किया। श्री राय द्वारा परचा दाखिल करके के बाद सपा नेताओं,कार्यकर्ताओं तथा उनके समर्थको में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। जगदीश राय इस इलाके से बसपा से लगातार तीन बार विधायक चुने गये है तथा दो बार सरकार में मंत्री बने थे। 2012 में उनका विजय रथ रूक गया। 2017 चुनाव में उन्हे सपा -कांग्रेस गठबंधन से टिकट मिला था लेकिन ऐन वख्त यह सीट सपा के खाते में जाने के कारण उन्हे चुनाव मैदान से बाहर आना पड़ा था। सन् 2018 में उन्होने बसपा छोड़कर साईकिल पर सवार हो गये थे।

जौनपुर जिले के राजनीत के क्षेत्र में चाणक्य कहे जाने वाले जगदीश नारायण राय गौराबादशाहपुर थाना क्षेत्र के कबीरूद्दीपुर गांव के मूल निवासी है। श्री राय राजनीति के क्षेत्र में पहलीबार छात्रसंघ चुनाव से कदम रखा तो आज तक पीछे मुड़कर नही देखा। जगदीश राय शिराज ए हिन्द डाॅट से खास बातचीत करते हुए बताया कि सन् 1969 में राजा कृष्णदत्त महाविद्यालय के छात्र संघ के चुनाव में महामंत्री चुना गया। उसके बाद वे टीडीपीजी कालेज के एलएलबी विभाग का संकाय अध्यक्ष बनाया गया । पढ़ाई समाप्त होने के बाद से ही उन्होने कांग्रेस पार्टी से जुड़कर राजनीत करते रहे। 

सन् 1989 में वे धर्मापुर ब्लाक के प्रमुख चुने गये। 1993 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने श्री राय को बयालसी विधान सभा से अपना प्रत्याशी बनाया लेकिन सपा-बसपा गठबंधन के कारण उन्हे हार का मुह देखना पड़ा। सन् 1996 के विधानसभा चुनाव में जगदीश राय कांग्रेस छोड़कर बसपा का दामन थाम लिया। इस बार वे भारी बहुमत से जीतकर पहलीबार विधानसभा में पहुंचे। विधायक चुने जाने के बाद जगदीश राय अपने क्षेत्र का विकास शुरू कर दिया। इस क्षेत्र में पुल की कमी के कारण यहां जनता को जिला मुख्यालय आने जाने के लिए 30 से 35 किलोमीटर दूरी तय करनी पड़ती थी। जगदीश ने पुलो का निमार्ण कराने का प्रयास शुरू किया ही साथ साथ सड़को की खस्ता हालत को सुधारने का कार्य जारी रखा। बिजली पानी के व्यवस्था करने लगे। जिसके कारण 2002 विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह के करीबी भाजपा प्रत्याशी देवानंद सिंह को पूरी तरह से नकारते हुए इस इलाके की जनता ने एक बार फिर जगदीश राय को आर्शीवाद देते हुए अपना विधायक चुन लिया।

 चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री मायावती ने अपनी सरकार में लघुउद्योग मंत्री बनाया। मंत्री बनने के बाद भी तामझाम से दूर रहते हुए श्री राय जनता की सेवा करते रहे। जिसका परिणाम रहा कि राजेपुर त्रिमुहानी के पास सई नदी पर पुल बेलावधाट के पास गोमती नदी पर पुल जफराबाद के पास नाव घाट पर पुल जमैथा गांव में अखड़ो माता घाट पर ब्रिज समेत कुल आठ पुलो का निर्माण शुरू हो गया। गांवो को जोड़ने वाली सड़को निमार्ण और मरम्मत का काम होने लगा। बिजली व्यवस्था चुस्त दुरूस्त करने के लिए आधा दर्जन से अधिक सब पावर स्टेशन की स्थापना कराया। पेय जल के लिए पानी की टंकी और हैण्ड पम्प लगवाना शुरू कर दिया। उनके कार्यो को देखते हुए बयालसी की जनता ने 2007 में तीसरी बार अपना विधायक जगदीश राय को ही चुना। जीत की हैट्रिक लगाने के बाद जगदीश राय जनता की सेवा करते रहे उधर मायावती इस बार उन्हे स्टाम्प एवं शुल्क पंजीयन विभाग का मंत्री बनाया। 

कुछ दिन बाद यह विभाग उनसे लेकर रेशम उद्योग और व्यवसायी शिक्षा मंत्री बनाया। जगदीश राय इस कार्यकाल में शिक्षा पर विशेष बल दिया। उन्होने मुफ्तीगंज में राजकीय महाविद्यालय की स्थापना आश्रम पद्यति विद्यालय और सीतम सराय बाजार के पास आईटीआई कालेज को स्थापित कराया। जगदीश राय शिराज ए हिन्द डाॅट से खास बातचीत करते हुए बताया कि अपने कार्यकाल में क्षेत्र में विकास की गंगा बहाने के साथ साथ पूर्वाचंल विश्वविद्यालय के पास 132 केवीए का पावर हाऊस पूर्वाचंल विकास निधि से स्थापित कराया। कलेक्टेªट में बना प्रेक्षागृह की शुरूआत मैने ही किया था अनुपम कालोनी में बना काशीराम गेस्ट हाऊस मेरे ही अथक प्रयास का नतीजा है। 2012 विधानसभा चुनाव में बयालसी विधानसभा का नाम बदलकर जफराबाद कर दिया गया। उधर सत्ता परिवर्तन की आंधी और बसपा में हुए बगावत के कारण इस बार के चुनाव में जगदीश राय को मामूली वोटो के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। 

2017 चुनाव में उन्हे सपा -कांग्रेस गठबंधन से टिकट मिला था लेकिन ऐन वख्त यह सीट सपा के खाते में जाने के कारण उन्हे चुनाव मैदान से बाहर आना पड़ा था। सन् 2018 में उन्होने बसपा छोड़कर साईकिल पर सवार हो गये थे।

काफी जद्दो जहद के बाद सुबह सपा - सुभाजपा गठबंधन से टिकट फाइनल हुआ तो जगदीश राय को छड़ी चुनाव निशान से टिकट मिला।  यह खबर मिलते ही सपा नेताओं,कार्यकर्ताओं तथा उनके समर्थको में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। 

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