अधिकारियों को क्यों नहीं दिखायी देती गरीबों की झोपड़ी?

 गौराबादशाहपुर, जौनपुर। स्थानीय नगर पंचायत अंतर्गत आने वाले गांवों की स्थिति कुछ ऐसी है कि जो लोग वास्तव में गरीब और कमजोर तबके के हैं जिनकी आवाज अधिकारियों के कानों तक नहीं पहुंच पाती, जिनकी बात अधिकारी सुनना भी नहीं पसंद करते। यही कारण है कि उन्हें उनके अधिकारों से वंचित कर दिया जाता है और उन्हें अनदेखा कर दिया जाता है। ऐसे ही ग्रामसभा बंजारेपुर की हाजरा बेगम जो विधवा है, के पास न रहने के लिये आवास है और न ही कोई रोजी-रोटी की उत्तम व्यवस्था है। किसी तरह से टूटी-फूटी झोपड़ी में गुजारा कर रही है लेकिन फिर भी इनकी समस्या न अधिकारियों को दिखाई दी और न ही उन दलालों को दिखाई दी। जिन्होंने उन लोगों को आवास मुहैया कराया जिनके पास रहने की समुचित व्यवस्था है, यहां कुछ लोग ऐसे हैं जो बने हुए पक्के मकान को तोड़कर आवास का लाभ ले रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे हैं जिनको रहने का ठिकाना नहीं है। अगर वास्तव में आवास आवंटन में जो धांधली हुई है, उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए तो 90 प्रतिशत पात्रों को आवास दिया ही नहीं गया है। गरीबों का हक अमीर खा रहे हैं।

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