किशोर न्याय अधिनियम पर संगोष्ठी का हुआ आयोजन

 जौनपुर। सरजू प्रसाद शैक्षिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था जज कालोनी के तत्वावधान में विधिक जागरूकता शिविर किशोर न्याय अधिनियम के तहत आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ जन शिक्षण संस्थान के डायरेक्टर डा. सुधा सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। तत्पश्चात् कहा कि पंचायतों के प्रतिनिधियों के माध्यम से जनजागरूकता बाल विवाह के संदर्भ में बड़े पैमाने पर की जा सकती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विधिक सेवा प्राधिकरण के मध्यस्थता अधिकारी डा. दिलीप सिंह ने कहा कि बाल विवाह पर पूरी दुनिया में लगभग सभी देश में प्राचीनतम काल से  विद्यमान रहा है लेकिन भारत में ज्ञात आंकड़ों में सबसे अधिक पूरी दुनिया में बाल विवाह होता है। एक आंकड़े के अनुसार दुनिया के सारे बाल विवाह का 40 प्रतिशत भारत में  होता है। इसमें हिमाचल प्रदेश में सबसे कम 9 प्रतिशत बाल विवाह होता है। सबसे अधिक बाल विवाह राजस्थान में होता है। मुख्य अतिथि जिला प्रोबेशन अधिकारी अभय कुमार ने कहा कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है। इसके लिए 2 साल तक की कड़ी कैद या 100000 तक के जुर्माने की सजा दी जा सकती है। बाल विवाह को रोकने के लिए अदालत निषेधाज्ञा जारी कर सकती है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए साहित्यकार गिरीश श्रीवास्तव गिरीश ने कहा कि बाल विवाह हमारे  सभ्य समाज के लिए एक कलंक  है। कार्यक्रम में मुख्य रूप से सुषमा सिंह, रिपुदमन सिंह, समन्वयक मनोज पाल, छाया उपाध्याय, ललितेश मिश्र, लक्ष्मी नारायण यादव, दिनेश मौर्य सहित तमाम लोग उपस्थित रहे। अन्त में कार्यक्रम आयोजक पूर्व चेयरमैन चाइल्ड वेलफेयर कमेटी/संस्था सचिव संजय उपाध्याय ने समस्त आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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