बरसठी ने बढ़ाया कदम तो अन्य ब्लाक ने भी दिखाया दम

जौनपुर : पुरुष नसबंदी में बेहतर प्रदर्शन के लिए बरसठी ब्लाक की पीठ थपथपाने का जनपद के अन्य ब्लाकों पर भी असर पड़ा। सत्र 2021-22 में जनपद का कोई भी ब्लाक पुरुष नसबंदी के मामले में शून्य नहीं है। सभी ब्लाकों के योगदान से जनपद में पुरुष नसबंदी का अनुमानित आंकड़ा 38 से भी 40 अंक बढ़कर 78 हो गया है।

    मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ लक्ष्मी सिंह का कहना है कि वर्ष 2021-22 में इस बेहतर प्रदर्शन में सभी ब्लाकों ने अपना योगदान दिया है। बरसठी ने अनुमानित दो पुरुष नसबंदी के सापेक्ष 26 पुरुषों को यह सेवा प्रदान की। सिरकोनी ने एक के सापेक्ष पांच, जलालपुर ने एक के सापेक्ष 10, सुइथाकला ने एक के सापेक्ष तीन, सिकरारा ने दो के सापेक्ष चार, डोभी ने एक के सापेक्ष दो सहित ज्यादातर ने अपने लिए अनुमानित संख्या  को या तो पूरा कर लिया है या तो उससे  अधिक उपलब्धि हासिल की है।

    बरसठी के एमओआईसी की भूमिका -
                  एसीएमओ डॉ राजीव कुमार का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 से पहले पुरुष नसबंदी में बरसठी ब्लाक ही दिखाई पड़ता था। बरसठी ने 2019-20 में 48 पुरुष नसबंदी, 2020-21 में 42 पुरुष नसबंदी, 2021-22 में 28 पुरुष नसबंदी की सेवा प्रदान की  थी। बरसठी में पुरुष नसबंदी का ग्राफ बढ़ाने में वहां के प्रभारी चिकित्साधिकारी (एमओआईसी) डॉ अजय सिंह ने  महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने भोपत गांव की आशा कार्यकर्ता गायत्री देवी को एक बार बुलाकर कहा कि महिला नसबंदी तो बहुत होती है जबकि इससे महिलाओं को दिक्कत होती है। उन्हें चीरा लगता है जिससे उन्हें 08-10 दिन बिस्तर पर रहकर आराम करना पड़ता है। आपरेशन के बाद उन्हें गैस बनती है जबकि पुरुषों की नसबंदी बहुत आसान होती है। महिलाएं ही ज्यादा नसबंदी के लिए प्रेरित की जाती हैं जबकि नसबंदी में पुरुषों की भागीदारी अधिक होनी चाहिए।

  पुरुष नसबंदी में गायत्री देवी का योगदान -
                   डॉ अजय सिंह के सुझाव को गायत्री देवी ने मिशन के तौर पर लिया। जब भी समय मिलता अपने तथा आस-पास के गांवों में लोगों को समझाने निकल जातीं। उन्हें बतातीं नसबंदी करवाने से किसी के पुरुषत्व में कमी नहीं आएगी। पुरुष वजन उठाने वाले काम भी कर सकेंगे जबकि जिन महिलाओं का सिजेरियन प्रसव हुआ है उन्हें नसबंदी करवाने से दिक्कत आएगी। इस दौरान कई बार अपमानजनक स्थितियां आईं। लोगों ने अपमानजनक शब्दावली भी प्रयोग की। फिर भी वह कोशिश करतीं रहीं। इस काम में उन्हें पति राजेंद्र प्रसाद पटेल का साथ मिलता रहा। उनकी कोशिशों का असर होने लगा। विरोध करने वाले के एक पड़ोसी पुरुष ने नसबंदी करवा ली। उसे देख ऐसे और एक-दो लोगों ने नसबंदी अपनाई। लाभार्थियों को फायदा हुआ तो वह दूसरों को भी समझाने लगे। इसके चलते भोपतपुर, बरसठी बाजार, मंगरा व अन्य गांवों से गायत्री देवी की सलाह पर तब से अब तक 70 पुरुष नसबंदी करा चुके हैं जो कि जिले के इतिहास में रिकार्ड है। गायत्री देवी ने बरसठी ब्लॉक की अन्य आशा कार्यकर्ताओं के क्षेत्र में जाकर लोगों को नसबंदी के लिए तैयार कराने में सहयोग किया है। उनके सहयोग से तुलसीपुर की अनीता देवी ने छह, भन्नौर की विद्यादेवी ने आठ, भन्नौर की ही सावित्री सिंह ने दो, जयरामपुर की सीमा ने दो, कान्हपर की संगीता सिंह ने दो पुरुष नसबंदी करवाई है। इस तरह से बरसठी क्षेत्र में उनके सहयोग से 90 पुरुष नसबंदी हो चुकी है।

  जिलाधिकारी का प्रोत्साहन -
                पुरुष नसबंदी में बेहतर प्रदर्शन के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह ने बरसठी के एमओआईसी डॉ अजय सिंह तथा आशा कार्यकर्ता गायत्री देवी को कलक्ट्रेट बुलाकर सम्मानित किया था। वर्तमान जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने भी उनके योगदान को सराहा। 29 सितंबर 2021 को जिला स्वास्थ्य समिति (डीएचएस) की बैठक में उन्होंने ज्यादा पुरुष नसबंदी करवाने के लिए डॉ अजय सिंह को प्रशस्ति पत्र दिया। इसके साथ ही अन्य ब्लाकों के प्रभारी चिकित्साधिकारियों/अधीक्षकों को अपने-अपने ब्लाकों में कम से कम दो पुरुष नसबंदी कराने का निर्देश दिया जिसका अब असर दिख रहा है। 2021-22 में सभी सीएचसी ने पुरुष नसबंदी में योगदान दिया।

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